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सेक्टर की तरह विकसित किए जाएं सभी क्षेत्र

7 वर्ष पहले
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भेलक्षेत्र के विकास को लेकर कई योजनाएं बनाई गईं। इसके बाद भी विकास व्यवस्थित दिखाई नहीं देता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि विकास के लिए अलग-अलग क्षेत्रों का विभाजन नहीं किया गया। महानगरों की तर्ज पर अगर इस क्षेत्र का भी विभाजन कर सेक्टर में विभाजित कर दिया जाए तो विकास का नक्शा तरीके से बनेगा। साथ ही हर सेक्टर की योजना भी जरूरत के अनुसार तय की जा सकेगी।

सेक्टर बनाने के साथ इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि विकास की सबसे ज्यादा जरूरत किस क्षेत्र को है। उदाहरण के तौर पर अयोध्या नगर के आसपास रायसेन रोड पर पर्यटन की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थान हैं, इन स्थानों को दो सेक्टर में बांटकर पर्यटन केंद्र बनाने के प्रयास करना होंगे। रामगढ़ का किला और समरधा रेंज के लिए अलग से प्रोजेक्ट बनाकर तुरंत विकास कार्यों को शुरू करवाना चाहिए। पुरातात्विक स्थान होने से यहां बड़े बजट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन स्थानों की देखभाल पुरातत्व विभाग को करना चाहिए। जबकि पहुंच मार्ग और अन्य व्यवस्थाएं नगर निगम को संभालना चाहिए।

कटारालहारपुर में विकास की दिशा अलग

भेलक्षेत्र में पुरातात्विक स्थानों के अलावा प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थान हैं। इन स्थानों को सजाने संवारने की व्यस्था के लिए अलग से प्रोजेक्ट तैयार किया जाए। कटारा हिल्स पर वन विभाग ने इकोलॉजीकल नक्षत्र पार्क का विकास किया है। यह पार्क अपने आप में अद्भुत है। इस पार्क का प्रचार पर्यटन केंद्र के तौर पर किया जाना चाहिए, जिससे लोगों को इसके बारे में जानकारी उपलब्ध हो सके। साथ ही बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी इस पार्क का भ्रमण कराना चाहिए। इसी तरह के कई और महत्वपूर्ण स्थान हैं, जिन्हें पर्यटन केंद्र की तरह विकसित किया जा सकता है।

किसी भी क्षेत्र का विकास करने के लिए महानगरों की तर्ज पर सेक्टर बना देना चाहिए। इससे विकास तेजी से और व्यवस्थित रूप से हो सकेगा। यह कहना है संतोष जैन का....