कोलार भास्कर.भोपाल
कोलार भास्कर.भोपाल
उपनगरमें वर्ष 2006 में आठ पंचायतों का विलय कर नगर पालिका का गठन किया गया था। सात साल बाद अब उस नगर पालिका का नगर निगम में विलय किया जा रहा है। ताकि कोलार का बेहतर ढंग से विकास हो और यहां के नागरिकों को शहर के नागरिकों की तरह ही पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलें। मगर कोलार का विलय करने के बाद नगर निगम के सामने कई चुनौतियां होंगी।
अव्वल तो ये कि निगम 70 वार्ड में विकास कराने में असमर्थ नजर आता है। कोलार को मिलाकर बनाए गए 85 वार्ड को कैसे संभाल पाएगाω निगम के अस्तित्व में आने के इतने सालों बाद भी निगम के कई क्षेत्र विकास में पिछड़े हुए हैं। ऐसे में कैसे सीमा वृद्धि कर मिलाए गए क्षेत्रों को संभाला जाएगा। यही नहीं, कोलार उपनगर को कैसे संभाला जाएगा, जिसमें नपा के कार्यकाल में जितना भी विकास हो पाया है, वो अव्यवस्थित और अयंत्रित है। ये सब कई ऐसे अहम सवाल हैं, जो आने वाले समय में निगम के सामने आएंगे और इनसे बचा नहीं जा सकेगा।
येहों चुनाव के मुद्दे
इससाल के अंत में होने वाले नगर निगम चुनाव में एक बार फिर राजनीतिक दलों के प्रत्याशी जनता के सामने हाथ जोड़कर वादे करने पहुंचेंगे। जनता को उनका स्वागत करना चाहिए, लेकिन इस बार उनसे सिर्फ चुनावी वादे ही नहीं करने चाहिए बल्कि उनको पुराने वादे याद दिलाने और उन वादों पर शपथ पत्र ले लेना चाहिए। जिसे दिखाकर अगले पांच सालों तक उन्हें बार-बार याद दिलाया जा सके कि उन्होंने दर-दर जाकर कसम खाई है।
मिलेकोलार डेम से पानी
कोलारमें कोलार डेम का पानी सप्लाई करने की राह अब आसान हो जाएगी। क्योंकि नपा और नगर निगम का भेद खत्म हो गया है। कोलार अब नगर निगम का हिस्सा हो गया है। जनप्रतिनिधियों को इसके लिए प्रयास करना चाहिए।