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समरधा के घने जंगलों के बीच रुक सकेंगे सैलानी

7 वर्ष पहले
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सैलानियों को भेल क्षेत्र में जल्दी ही ईको टूरिज्म का स्थान लुत्फ उठाने का मौका मिल सकता है। घने जंगलों के बीच बसे हुए समरधा ईको टूरिज्म में हट्स बनकर तैयार हो गई हैं, जिसमें दिन में प्राकृतिक रोशनी और रात में बिजली की व्यवस्था रहेगी। इन हट्स का आकार कटोरे के समान गोलाई में तैयार किया गया है, जबकि ऊंचाई करीब 8 फीट है।

ईको टूरिज्म विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे इस पर्यटन केंद्र तक जाने के लिए रामगढ़ किले के पास से ही पड़ारिया काछी ग्राम होते हुए जाना पड़ता है। आनंद नगर से करीब 8 किलोमीटर दूर समरधा रेंज शुरू हो जाती है। इस रेंज से करीब 8 किलोमीटर अंदर और जाकर समरधा पर्यटन केंद्र पहुचेंगे। घने जंगलों के बीच बने इस पर्यटन केंद्र की विशेषता यह है कि चारों ओर घना जंगल है। पड़ारिया काछी गांव के लोगों का कहना है कि इन घने जंगलों में कई बार बाघ भी देखा गया है। काले अन्य हिरण सामान्य तौर पर यहां विचरण करते रहते हैं। समरधा रेंज वन विभाग का प्रमुख स्थान है। इसलिए उस विभाग का एक बड़ा गेस्ट हाउस और सर्चिंग टॉवर भी मौजूद है। इस विभाग के गार्ड भी जंगलों की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं।

जंगलों के बीच में एक तालाब है, जो बारिश के पानी से भरा रहता है। इस तालाब में पानी पीते हुए कई जंगली जानवरों को देखा जा सकता है। ईको टूरिज्म विभाग द्वारा बनाई गईं हट्स को इस तरह से बनाया गया है कि जंगली जानवर किसी प्रकार का कोई नुकसान पहुंचा पाएं।

समरधा में गेस्ट हाउस के पास लगा पत्थर, जिसमें सैलानियों के लिए जानकारी अंकित है।

इनका कहना है

सैलानियों के लिए होना हैं कई व्यवस्थाएं

ईको टूरिज्म के अधिकारियों के अनुसार समरधा को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए तीन साल पहले प्लानिंग बनी थी, लेकिन किसी कारण से काम बीच में रुक गए थे। हट्स बनने के बाद उन्हें बंद कर दिया गया था। हट्स के साथ ही यहां रिसोर्ट खोलने का भी प्रस्ताव है, जिससे सैलानियों को चाय, कॉफी अन्य व्यंजन आसानी से उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा सैलानियों को नेचर ट्रेल, ट्रेकिंग, राॅक क्लाइंबिंग की सुविधा देने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। जबकि बर्ड वाॅचिंग सेंटर तालाब के किनारे बनाने की तैयारी की गई है।

दो हैक्टेयर का प्रस्ताव वर्ष 2008 में भेजा था

ईको टूरिज्म विभाग ने वर्ष 2008 में वन विभाग को एक प्रस्ताव भेजकर समरधा रेंज में दो