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हंगामा करने पर महिला मरीज को चार घंटे बाद चढ़ाई बॉटल

7 वर्ष पहले
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इंद्रपुरी स्थित बीमा अस्पताल में लोगों को समझ नहीं रहा कि किसके भरोसे मरीज को भर्ती करें, क्योंकि पिछले दिनों एक महिला मरीज को भर्ती करने पर उस समय इलाज मिला जब परिवारजनों ने काफी हंगामा किया। हंगामे के बाद श्रमिक नेताओं ने पहुंचकर अस्पताल में मौजूद एक मात्र नर्स से इलाज शुरू करने को कहा। इसके बाद महिला मरीज को बॉटल चढ़ाई गई, जबकि वह गंभीर स्थिति में थी। ये तो एक बानगी है। इस तरह के केस यहां आए दिन देखने मिल रहे हैं।

एक मरीज के परिजन वहीद के अनुसार इस अस्पताल में आना सबसे बड़ी भूल है। सबसे पहले डाॅक्टर को ढूंढना पड़ता है, क्योंकि अधिकतर कमरों में ताले लगे रहते हैं। उसके बाद भर्ती होने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। किसी तरह पलंग मिला तो नर्स को पूरे अस्पताल में तलाश करना पड़ता है, क्योंकि एक ही नर्स नजर आती है। बीमा अस्पताल इलाज कराने पहुंचे सुब्रह्मण्यम अय्यर के अनुसार सही जानकारी मिलने से मरीज इधर-उधर भटकते रहते हैं। यहां आने वालों में भेल, गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, अन्य संस्थानों ठेकेदारों के श्रमिक हैं, लेकिन किसी को भी सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। करीब 44 हजार श्रमिक श्रमिकों के परिवार के सदस्य में से रोजाना करीब 350 से 400 लोग यहां रहे हैं। इन्हें तो इलाज मिल पा रहा है और ही किसी प्रकार की जांच हो पा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यहां डॉक्टर नहीं हैं तो क्या हुआ बाहर रैफर करने से उनका पैसा तो नहीं लग रहा है। जबकि बीमार व्यक्ति रैफर करने के बाद इधर-उधर भटकता है। श्रमिक नेता मनीष गौतम के अनुसार वैसे तो स्टाफ होने मशीनों के खराब होने से कोई भर्ती होना नहीं चाहता। इसके बाद भी अगर मजबूरी में भर्ती होना पड़े तो उसका इलाज होने की जगह स्थिति और ज्यादा खराब हो जाएगी। मरीजों को अपने सामान की सुरक्षा भी स्वयं ही करनी पड़ती है। क्योंकि यहां तो सुरक्षा गार्ड हैं और ही कोई देखरेख करने वाला।

{किसके भरोसें भर्ती रहें मरीज बीमा अस्पताल में { एक नर्स के भरोसे चल रहा है अस्पताल {इंदौर की नर्स अटैच हैं भोपाल में {थोड़े बहुत ही पहुंच रहे हैं मरीज, उन्हें भी नहीं मिल रहा इलाज