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मंदिरों की कृषि भूमि की नीलामी पर रोक

7 वर्ष पहले
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राज्यशासन ने प्रदेश के शासन संधारित मंदिरों की कृषि भूमि को लीज पर देने के लिए की जाने वाली नीलामी पर अस्थाई रोक लगा दी है। इसके अलावा राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि प्रदेश के जिन मंदिर परिसरों और उनके आसपास जो भी सरोवर, झरने, कुएं बावड़ी आदि जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं, उनकी साफ-सफाई कराने के साथ ही उनका जीर्णोद्धार कराया जाएगा, जिससे वह जल स्त्रोत पुन: विकसित होकर सुंदर रूप ले सकें।

इन फैसलों से संबंधित आदेश धर्मस्व न्यास विभाग ने जारी कर दिए हैं। इन आदेशों के जारी होने की प्रमुख सचिव संस्कृति धर्मस्व न्यास मनोज श्रीवास्तव ने पुष्टि की है। दूसरी ओर संत समिति की प्रदेश इकाई की गुरूवार को हुई बैठक में मांग की गई कि शासन विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों को हटाने से पहले उनके पुनर्स्थापन की व्यवस्था करे। अभा संत समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत चैतन्य ब्रह्मचारी प्रवक्ता वासुदेवानंद ने बताया कि एयरपोर्ट रोड, मनुआभान की टेकरी स्थित दंडी आश्रम में समिति की प्रदेश इकाई की बैठक अध्यक्ष महंत भगवानदास श्रृंगारी की अध्यक्षता में हुई। इसमें शासन द्व‌ारा जारी मंदिरों की कृषि भूमि नीलामी पर अस्थाई रोक सरोवर बावड़ियों के जीर्णोद्व‌ार संबंधी आदेशों की प्रतियां संतों पुजारियों को सौंपी गईं। सभी से कहा गया कि वे इस संबंध में अपने जिलों के कलेक्टरों को मंदिरों की सूचियां दें, जिन मंदिरों के पास कृषि भूमि और सरोवर आदि हैं।

नीलामीसे होती है हानि : बैठकमें प्रदेश उपाध्यक्ष हेमेंद्र ब्रह्मचारी ने कहा कि जो व्यक्ति (बोलीदार) मंदिर की भूमि लेता है, वह एक वर्ष में अधिकतम लाभ पाने की नीति से काम करता है। वह फसल चक्र की जानकारी नहीं होने के कारण रासायनिक दवाओं का छिड़काव करता है। इससे भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है।

देवालयों के सरोवर, कुओं और बाावड़ियों का शासन कराएगा जीर्णोद्धार