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मोबाइल फोन पर व्यस्त रहते हैं मम्मी-पापा, किससे करें बात
पेरेंट्सघर में अधिकतर समय फेसबुक और वाट्स एप पर व्यस्त रहने की वजह से अपने बच्चों को क्वालिटी टाइम नहीं दे रहे हैं। इस कारण बच्चों में आक्रामकता और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। यह खुलासा जेपी अस्पताल में स्थित टीन एजर काउंसलिंग सेंटर में रही शिकायतों में हुआ है।
70 प्रतिशत बच्चों की यही शिकायत है कि उनके माता-पिता छोटी-छोटी बात पर डांटते हैं। काउंसलिंग सेंटर की हेल्प लाइन पर सबसे ज्यादा कॉल उन बच्चों के रहे हैं, जिनके पेरेंट्स वर्किंग हैं। इसमें डॉक्टर, प्रोफेसर, आईटी इंजीनियर सहित आईएएस अफसरों के बच्चे शामिल हैं। टीन एजर हेल्प लाइन 1800-233-1250 में हर माह 200 से अधिक फोन पहुंचते हैं।
काउंसलर प्रीति माथुर ने बताया कि उनके पास पहुंचीं कुछ कॉल ऐसी थीं, जिसमें बच्चों की शिकायत का आधार पेरेंट द्वारा क्वालिटी टाइम देने की वजह टीवी, मोबाइल, लेपटॉप पर अधिक समय बिताना निकला। कॉल करने वाले बच्चे 8 से 16 वर्ष आयु वर्ग के हैं। श्रीमती माथुर ने बताया कि शिकायत करने वाले बच्चों की काउंसलिंग में पता चला कि उनके पेरेंट्स घर पर तो होते हैं, लेकिन उनके पास बच्चों के साथ बिताने का समय नहीं होता। पेरेंटस मोबाइल फोन पर व्यस्त रहते हैं या फिर टीवी देखने में।
क्या करें अभिभावक काउंसलरप्रियंका राजपूत ने बताया कि ऐसे पेरेंट जो वर्किंग हैं, वह अपने बच्चों के लिए समय निकालें। बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा संवाद रखें। बच्चों के साथ वक्त गुजारते वक्त मोबाइल फोन को साइलेंट पर रखें।
इस तरह की समस्या का सामना करते हैं बच्चे
चिड़चिड़ापन,धैर्य एवं पढ़ाई में एकाग्रता की कमी, भाई या बहनों के साथ झगड़ा करना, ज्यादा वक्त घर के बाहर गुजारना, डिप्रेशन, बार-बार बीमार पड़ना, कहना मानना, झूठ बोलना, बात करने में झिझकना जैसी कई समस्याओं से बच्चे ग्रसित रहते हैं।
(सामाजिक विषय में आईं पेरेंटस, डिप्रेशन, स्ट्रेस की शिकायतें)
कुल कॉल|: 19,421(2मई 2013 से 30 नंवबर 2014)
किसके कितने कॉल
पुरुष8,265
महिला 10,160
ब्लैंक कॉल 996
विषय कॉल
सामाजिक6,076
कॅरियर 2,921
पढ़ाई 2,896
व्यक्तिगत 2,819
जनरल हेल्थ 1,972
सेक्स संबंधी 1,618
न्यूट्रीशन डाइट 1,119