किसीगुरु से संगीत
उनके रिकॉर्ड्स सुनता था
\\\"मेरापंडित जसराज के प्रति रुझान इस कदर था कि 1993 में रिद्म हाउस, बंबई (अब मुंबई) से उनके सारे रिकाॅर्ड्स खरीद लिए थे।\\\' संगीत के क्षेत्र में गौतम काले आज एक जाना पहचाना नाम हैं। उन्हें सुधीर फड़के अवाॅर्ड से नवाजा जा चुका है।
किसीगुरु से संगीत का ज्ञान तो हर शिष्य लेता है, लेकिन मन ही मन गुरु मानकर उन्हें सुनते हुए सीखना अलग ही बात होती है। पं. जसराज के शिष्य गौतम काले ऐसे ही एकलव्य रूपी शिष्य हैं। इंदौर के रहने वाले गौतम सारेगामा म्यूजिक स्कूल चलाते हैं। इसकी एक शाखा जल्द ही भोपाल में भी खुलेगी। यहां म्यूजिक सिखाने के लिए टीचर्स को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इसी सिलसिले में भोपाल आए गौतम से सिटी भास्कर ने खास बातचीत की।
पहलेसे ही गुरु की आवाज का मुरीद था
\\\"मैंबचपन से ही पं. जसराज की आवाज का मुरीद था। साल 1994 में पहली बार उन्हें लाइव सुनने का मौका मिला। बस, तभी से उन्हें गुरु मानकर संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। साल 2000 में पंडितजी अकोला में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे। मुझे जैसे ही पता चला, वहां पहुंच गया। जब वे ग्रीन रूम में थे, तो मैं खिड़की के झरोखे से उन्हें निहारने लगा। पंडितजी ने मुझे ऐसा करते देखा तो पास बुला लिया। मेरे बारे में थोड़ा-बहुत पूछकर उन्होंने मुझे अपने साथ स्टेज पर बुलाया और तानपुरा बजाने के लिए बिठा लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मुझसे गाने को भी कहा। इस प्रोग्राम के बाद उन्होंने मुझे अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया।\\\'
घुड़सवारीका शौक है
गौतमको संगीत के अलावा किसी चीज का शाैक है, तो वह है घुड़सवारी का। लगातार 24.30 घंटे तक घुड़सवारी करने का रिकाॅर्ड भी इनके नाम पर दर्ज है।