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‘मुझे शायरी से इश्क है’ बुकलॉन्चिंग के लिए शनिवार को भोपाल आए गीतकार इरशाद कामिल से बातचीत

6 वर्ष पहले
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‘मैंआठवीं में था। तब से मुझे शायरी से इश्क हुआ। उन दिनों गर्मी की छुटि्टयों में या तो हम खेलते थे या फिर रेडियो सुनते थे। मैं रेडियो ज्यादा सुनता था। तब गीत-ग़ज़लों की पेशकश काफी हुआ करती थी। यहीं से शायरी के लिए मेरा इश्क और बढ़ा।’

यह कहना है मशहूर शायर इरशाद कामिल का। वे शनिवार को भोपाल आए। यहां उनकी नई कृति ‘एक महीना नज्मों का’ का लोकार्पण हुआ। इरशाद ने होटल जहांनुमा पैलेस में सिटी भास्कर से विशेष बातचीत में कुछ पर्सनल और कुछ प्रोफेशनल बातें शेयर कीं।

खूनमें है उर्दू-हिंदी प्रेम

‘मैंनेबॉलीवुड में कई बंदिशों के बीच जरूर लिखा है, लेकिन कभी अपनी कलम को मैंने रुसवा नहीं किया। मैंने समझौते नहीं किए। इसकी वजह यह है कि हिंदी और उर्दू का प्रेम मेरे खून में है। बॉलीवुड में मैंने खुद की शर्तों पर ही लेखन किया है। यही फीलिंग मुझे लगातार ताज़ी और रूमानियत भरी रचनाओं के लिए प्रेरित करती है।’

मांके नाम पर शुरू किया स्कॉलरशिप

‘मैंनेपंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए मां के नाम से स्कॉलरशिप शुरू की है। इसका नाम ‘बेगम इकबाल बानो स्कॉलरशिप’ है। यह यूनिवर्सिटी में किसी भी लेवल पर फर्स्ट रैंक प्राप्त करने वाले किन्हीं भी दो स्टूडेंट्स (हिंदी) को दी जाती है।’

भोपालमें बुक लॉन्च करने की खास वजह

‘यहअदब का शहर है। ‘एक महीना नज्मों का’ में जो मैंने लिखा है, वह अदबी लोगों के लिए ही है। इस किताब की लॉन्चिंग के लिए भोपाल से अच्छा शहर मुझे कोई दूसरा नहीं लगा।’

ट्रैवलिंगपसंद है

‘मुझेघूमना-फिरना काफी पसंद है। मैं 30 दिन में से बमुश्किल 15 दिन ही मुंबई में रहता हूं। बाकी का समय मैं कहीं घूम-फिरकर बिताता हूं। इससे मुझे ताजगी मिलती है।’

इश्कसबका हक है

‘इश्कसबका हक है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि इश्क किससे है। मैं शायरी का आशिक हूं। मैंने लोगों की भावनाओं का ध्यान रखा है। ‘जब वी मेट’ हो, ‘हैप्पी न्यू ईयर’ हो या ‘रॉकस्टार’... हर फिल्म में नया-ताज़ा लिखा है। इनके गीत आज भी याद रखे गए हैं।’

सीखकरजाएं बॉलीवुड

‘मैंजब मुंबई पहुंचा तब मेरे पास एक सीरियल की स्क्रिप्ट थी। बॉलीवुड पहुंचने से पहले मैं खुद को इतना तैयार कर चुका था कि मुझे स्ट्रगल नहीं करना पड़ा। सालभर में ही मुझे इम्तियाज अली की ‘सोचा था’ के लिए गीत लिखने का ऑफर आया। मुंबई एक ऐसी जगह है, जहां टैलेंट की कद्र होती है, लेकिन यहां प्लेटफॉर्म पाने के लिए पहले से सीखकर आना चाहिए।’

‘जोभी मैं...’ फेवरेट सॉन्ग

इरशादने ‘राॅकस्टार’ के गाने ‘जो भी मैं...’ को कॉलर ट्यून बनाया है। यह गीत उनका पसंदीदा है।