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आयोग ने खारिज की एसटीएफ की रिपोर्ट, अब एसपी से मांगी जानकारी
मप्रमानवाधिकार आयोग ने व्यापमं की पीएमटी 2012-13 में गड़बड़ी के आरोपी छात्र-छात्राओं की गिरफ्तारी के संबंध अब 23 जिलों के एसपी से रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए आयोग ने एसपी को 15 फरवरी तक का समय दिया है। आयोग ने एसटीएफ की रिपोर्ट को अधूरी और गुमराह करने वाली बताया है।
एसटीएफ एडीजी आशीष खरे ने आयोग को दूसरी रिपोर्ट 21 नवंबर 2014 को भेजी थी। इसमें उन्होंने 154 छात्राओं की लिस्ट भेजी है। इस लिस्ट में एसटीएफ ने 19 जून को 14 छात्र-छात्राओं को जेल भेजना बताया है। इसके अलावा 61 स्टूडेंट को विभिन्न जिलों की पुलिस द्वारा भोपाल लाए जाने की जानकारी दी गई है। मानवाधिकार आयोग के अपर संचालक (जनसंपर्क) रोहित मेहता ने बताया कि दोनों रिपोर्ट मेें काफी अंतर है। आयोग ने मामले की सच्चाई जानने के लिए एसपी से रिपोर्ट मांगी है कि उनके जिले से पीएमटी गड़बड़ी मामले में पुलिस ने कितने स्टूडेंट को कस्टडी में लिया था और कब भोपाल भेजा था।
पहलेबताए थे 32 छात्र : एडीजीने 19 जुलाई 2014 को आयोग को जानकारी दी थी कि 18-19 जून को विभिन्न जिलों से 32 स्टूडेंट को लाया गया था। इसमें से 23 को पूछताछ के बाद न्यायालय द्वारा स्वीकृत अग्रिम जमानत के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया और 9 स्टूडेंट को जेल भेज दिया गया था।
एसटीएफ ने पीएमटी में गड़बड़ी मामले में बीती जून में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में संदिग्ध स्टूडेंट और परिजनों को पूछताछ के लिए भोपाल तलब किया था। संबंधित जिलों की पुलिस को एसटीएफ ने आरोपियों की सूची दी थी। वहां की पुलिस ने उन्हें पकड़ा और भोपाल लेकर आई। यहां उन्हें टीटी नगर महिला थाने में रखा गया था।
^आयोग ने मामले की सच्चाई जानने के लिए अब 23 जिलों के एसपी से कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। पूरी जानकारी आने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई होगी। वीरेंद्रमोहन कंवर, कार्यवाहक अध्यक्ष मानवाधिकार आयोग