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बिना नर्मदा टैक्स के बिल्डिंग परमिशन नहीं देगा निगम
इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्टर | भोपाल
नगरनिगम प्रशासन, बिल्डिंग परमिशन पर पहले की तरह ही नर्मदा टैक्स की वसूली करेगा। हालांकि अब निगम लोगों से यह टैक्स सशर्त वसूलेगा। इसके तहत यदि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को यथावत रखा तो लोगों को टैक्स की रकम वापस मिल जाएगी। यदि हाईकोर्ट के फैसले के उलट सुप्रीम कोर्ट का फैसला आता है तो निगम प्रशासन टैक्स की रकम वापस नहीं करेगा।
हाईकोर्ट ने बिल्डरों की एसोसिएशन क्रेडाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए 13 जनवरी को नर्मदा के पानी की सप्लाई के एवज में बिल्डिंग परमिशन पर लगाए गए नर्मदा टैक्स को निरस्त करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इसे अवैध करार देते हुए नगर निगम को नर्मदा टैक्स के रूप में वसूले गए 34 करोड़ रुपए और इस पर 9 फीसदी की दर से पेनाल्टी की 6 करोड़ रुपए की रकम भी लोगों को वापस करने का आदेश दिया था। इस पर नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। कोर्ट ने अपील मंजूर करते हुए केस का फैसला होने तक इस राशि को लौटाने पर रोक लगा दी।
फैसले में इस बात का जिक्र नहीं है कि नई बिल्डिंग परमिशन पर नर्मदा टैक्स वसूला जाए या नहीं। क्रेडाई के वकील सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा नर्मदा टैक्स को अवैध करार दिए जाने पर नगर निगम को कोई राहत नहीं दी है। इसलिए अभी नर्मदा टैक्स की वसूली अवैध होगी। इधर, निगम के राजस्व अधिकारी प्रदीप वर्मा का कहना है कि इस मामले में विधिक सलाह ली गई है। इसके तहत निगम यह टैक्स सशर्त वसूल सकता है।
गौरतलब है कि निगम ने 24 सितंबर 2012 को यह टैक्स लागू किया था। इसमें निगम 1 रुपए प्रति वर्गफीट से लेकर 15 रुपए प्रति वर्गफीट तक नर्मदा टैक्स लेता है।