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अवैध कॉलोनियाें पर कार्रवाई के लिए अमले की कमी का बहाना
इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्टर | भोपाल
सस्तीदरों पर अवैध कॉलोनी में प्लॉट बेचने का झांसा देने वाले बिल्डरों और जमीन मालिकों पर कार्रवाई से बचने के लिए जिला प्रशासन ने अमले की कमी का बहाना बनाया है। जिला प्रशासन के पास कार्रवाई के अधिकार होने के बाद भी वह इसकी जिम्मेदारी टीएंडसीपी पर डाल रहा है। इसके चलते एक साल में अस्तित्व में आई 50 से ज्यादा नई अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की खरीद-फरोख्त जारी है।
गुरुवार को दैनिक भास्कर में ‘सरकार की अनदेखी, एक ही साल में बन गईं 50 से ज्यादा अवैध कॉलोनी’ शीर्षक से प्रकाशित खबर पर डायरेक्टोरेट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने कलेक्टर निशांत वरवड़े को कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया। टीएंडसीपी संचालनालय के मुताबिक जिला कार्यालय भी कलेक्टर के मातहत ही काम करता है। इसलिए कलेक्टर अपने अमले के साथ मिलकर अवैध कॉलोनी के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
टीएंडसीपी अफसरों के मुताबिक अवैध कॉलोनी के लिए जिन-जिन नियमों में कार्रवाई के प्रावधान हैं, उनके पालन का दायित्व कलेक्टर और उनके अधीनस्थ अफसरों का है। इधर, कलेक्टर निशांत वरवड़े ने एक बार फिर कहा है कि अवैध कॉलोनी का निर्माण रोकने की जिम्मेदारी टीएंडसीपी की है। जिला प्रशासन के पास इतना अमला नहीं है कि वह अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर कार्रवाई करें।
निगम सीमा में नीलबड़ के शामिल होने के बाद भी अवैध कॉलोनियां कट रही हैं।