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सिंचाई के लिए कोलार डेम से अब पूरे साल मिलेगा पानी

7 वर्ष पहले
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कोलारडेम से अब पूरे साल सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसके लिए इस डेम में सीहोर जिले की सीप नदी का पानी लाया जाएगा। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड इस परियोजना के लिए धन उपलब्ध कराएगा। यह जानकारी राजधानी के प्रवास पर आए नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. हर्ष कुमार भानवाला ने शुक्रवार को डेम का निरीक्षण के बाद दी। उन्होंने कहा कि नाबार्ड नए वित्तीय वर्ष 2015-16 में मध्यप्रदेश सरकार को कुल 2,000 करोड़ रुपए का कर्ज देगा। इसी धन से यह परियोजना पूरी होगी। सीप नर्मदा की सहायक नदी है। इससे डेम पर पूरे साल पानी आता रहेगा।

पिछले वर्ष मई माह में शहर के सभी क्षेत्रों में बराबर जल अापूर्ति के लिए भोपाल नगर निगम में कोलार डेम को नर्मदा नदी से जोड़ने का प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि इसमें बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। यह प्रस्ताव लाने वाले कांग्रेस पार्षद गिरीश शर्मा ने बताया कि कोलार डेम को सीप नदी से जोड़ने से कोलार जैसे क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत खत्म होगी। हालांकि सरकार को इस फंड का उपयोग कोलार की पुरानी पाइपलाइन को भी ठीक करने में किया जाना चाहिए। नाबार्ड इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फंड से अब तक मप्र सरकार को 16,000 करोड़ रुपए दे चुका है। इसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करने के साथ कृषि की उत्पादकता बढ़ाने में हुआ है।

मध्यप्रदेशके संतरे को मिलेगा विशेष दर्जा

नाबार्डपश्चिम बंगाल के अालू, हरियाणा के टमाटर और महाराष्ट्र की प्याज की तर्ज पर मप्र में संतरे की फसल के लिए खास प्रयास करेगा। इसके तहत संतरे लगाने वाले किसानों को विशेष प्रशिक्षण के साथ स्टोरेज और वेयरहाउसिंग क्षमता विकसित करने के लिए विशेष कर्ज दिए जाएंगे। पहले तीन स्थानों पर नाबार्ड ने कर्ज के लिए 35 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है। इस राशि का उपयोग यहां भी होगा। डॉ. भानवाला ने बताया कि रतलाम को संतरा उत्पादक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

डॉ. हर्ष कुमार भानवाला

नाबार्ड प्रमुख ने बताया कि मध्यप्रदेश की कुछ सहकारी बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मापदंडों का उल्लंघन करते हुए स्टेटरी लिक्विडिटी रेशियो एसएलआर (आरबीआई) के पास नहीं जमा कराया। आरबीआई के मानकों के अनुसार बैंक अपने ग्राहक से 100 रुपए का डिपॉजिट लेता है तो उसे 23 रुपए एसएलआर के लिए आरबीआई के पास रखना पड़ते हैं। शेष बचे धन में नकद तरलता अनुपात अलग रखा जाता है। इसके बाद जो राशि बचती है, वही बतौर कर्ज दी जा सकती है। डॉ. भानवाला ने बताया कि प्रदेश की दो से तीन बैंकों ने एसएलआर का धन सुरक्षित रखे बगैर कर्ज दे दिया है। इन बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश आरबीआई से की गई है। जहां इन पर भारी पेनॉल्टी लगाने के साथ लाइसेंस रद्द रखने की कार्रवाई की जा सकती है।