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गिर गया रंगमंच से परदा

7 वर्ष पहले
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अभिनेताविजय दिंडोरकर दुनिया के इस रंगमंच को गुरुवार को अलविदा कह गए। हिंदी और मराठी नाटकों में प्राण फूंकने वाले श्री दिंडोरकर पिछले साठ साल से प्रभावी किरदार निभाते रहे। उनके जाने से शहर के कलाजगत में शोक छा गया है।

रंगमंचको दिए 60 साल: श्रीदिंडोरकर 60 साल से रंगमंच पर सक्रिय भूमिका निभाते आए थे। रंगकर्मी अशोक बुलानी बताते हैं कि वे एक चरित्र अभिनेता थे। कॉमेडी से लेकर गंभीर से गंभीर किरदारों को भी उन्होंने बखूबी निभाया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सर्किल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नाटक का मंचन शुरू करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। उन्होंने नाटक ‘शिकार’ में 50 बार से ज्यादा कॉमिक हीरो का किरदार निभाया।

रंगायन नाट्य संस्था को दिए जीवन के 35 साल

श्री डिंडोरकर का रंगायन नाट्य संस्था से 35 साल पुराना रिश्ता रहा। उन्होंने ‘शिकार’, ‘व्यक्तिगत’, ‘खामोश अदालत’ आदि नाटकों में सराहनीय और यादगार भूमिकाएं कीं। वहीं, नाटक ‘काले गुलाब पर सुनहरे छींटे’ में निभाया गया उनका विलेन का किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में कैद है। वे कैंसर से आखिरी दम तक लड़ते रहे, लेकिन रंगमंच को कभी नाता नहीं छोड़ा। उन्होंने आखिरी बार मराठी नाटक ‘घरो-घरी चे होत बोम्ब’ में अभिनय किया।

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