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दो हजार की किट होने से शहर में अटकी स्वाइन फ्लू की जांच
राजधानीमें महज दो हजार रुपए की किट के अभाव में स्वाइन फ्लू के सैंपल की जांच नहीं हो पा रही है। भोपाल मेमोरियल अस्पताल में इस बीमारी की जांच की सुविधा उपलब्ध है, वहां सिर्फ किट की दरकार है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग यह किट खरीदकर दे दें। इधर, विभाग के अफसर नियमों का हवाला देकर दलील दे रहे हैं कि केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद ही यह किट खरीदी जा सकती है। बीमारी की जांच को लेकर यह हाल तब है, जबकि शहर में स्वाइन फ्लू से पिछले कुछ समय में तीन मौतें हो चुकी हैं।
राजधानी में स्वाइन फ्लू के कुल 88 संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा है। संदिग्ध मरीजों के सैंपल आईसीएमआर की जबलपुर स्थित लैब में जांच के लिए भेजे जाते हैं। वहां से रिपोर्ट आने में समय लग जाता है। जानकार मानते हैं कि इस अवधि में मरीज के शरीर में संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है।
इधर, भोपाल मेमोरियल अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. मनोज पांडे का कहना है कि संस्थान में स्वाइन फ्लू की जांच हो सकती है, बशर्ते राज्य सरकार इसके लिए जरूरी किट मुहैया करा दे। इस मामले में डायरेक्टर हेल्थ डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने कहा कि किट खरीदने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल भोपाल मेमोरियल अस्पताल के प्रबंधन को पत्र लिखकर पूछा गया है कि वहां स्वाइन फ्लू की जांच हो सकती है या नहीं।
डॉ. पांडे ने बताया कि अस्पताल की लैब बायाे सेफ्टी लेवल-टू की है। इसे लेवल थ्री में अपग्रेड किया जा रहा है। 15 दिसंबर से यह काम शुरू हो जाएगा।
संदिग्ध मरीज का सैंपल उसी दिन भोपाल मेमोरियल अस्पताल में पहुंचा दिया जाएगा। अधिक से अधिक 24 घंटे में उसकी रिपोर्ट मिल जाएगी। इससे पॉजिटिव पाए गए मरीज के आइसोलेशन एवं उपचार का समय रहते प्रबंध किया जा सकेगा।
भोपाल के सीएमएचओ ने पिछले साल घोषणा की थी कि भोपाल मेमोरियल अस्पताल में एक साल में स्वाइन फ्लू की जांच होने लगेगी। तब भी स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में पत्र लिखा था। अब तक जांच की सुविधा शुरू होने पर विभाग ने दोबारा पत्र भेजा है। भास्कर ने इस बारे में दिल्ली में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव लव वर्मा से फोन पर संपर्क किया। वर्मा यह नहीं बता सके कि अस्पताल में जांच क्यों शुरू नहीं हो रही है।