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समाज के लिए क्राइम रिपोर्टिंग में सकारात्मकता जरूरी
क्राइमरिपोर्टिंग संवेदनशील विषय है। इस दौरान यदि सकारात्मकता का ख्याल रखा जाए तो समाज पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। ये बात ‘क्राइम रिपोर्टिंग एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण’ विषय पर आयोजित सेमिनार में सामने आई।
मंगलवार को एमपी नगर की एक होटल में आयोजित इस सेमिनार में आईईएस समूह के चेयरमैन इंजीनियर बीएस यादव ने कहा कि क्राइम रिपोर्टिंग बहुत जटिल और संवेदनशील है। यह विभिन्न श्रेणियों के पाठकों पर अलग-अलग प्रभाव डालता है। मप्र बाल आयोग के पूर्व सदस्य विभांशु जोशी ने कहा कि अपराध की खबरों में सकारात्मक तथ्य ज्यादा होना चाहिए और पाठकों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पुष्पेंद्र पाल सिंह ने अपराधों को रोकने के लिए सकारात्मक सोच की पैरवी की। साइकोलॉजिस्ट डॉ. जगमीत चावला, कैरियर काउंसलर गौरवराज भगत, डॉ. ललित श्रीवास्तव और मैनिट की प्रोफेसर तृप्ता ठाकुर ने अपराध और अपराधियों की प्रवृत्तियों से होने वाले खतरों के बारे में बताया। इस अवसर पर दैनिक भास्कर के डिप्टी एडिटर भगवान उपाध्याय ने कहा कि क्राइम रिपोर्टिंग में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। अब अपराधों से बचने के तरीके और अपराधियों का बहादुरी से मुकाबला करने संबंधी समाचार प्रमुखता से प्रकाशित हो रहे हैं। पत्रकार उरुक्रम शर्मा, जुगलकिशोर शर्मा आदि ने भी विचार रखे।