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ब्रह्म पहले स्त्री, बाद में पुरुष हैं : अवधेशानंद जी

6 वर्ष पहले
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रवींद्रभवन के मुक्ताकाश मंच से जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने मंगलवार को भागवत कथा के माध्यम से ब्रह्म‌ सत्ता के कई रहस्यों को उद्घाटित करते हुए कहा कि ब्रह्म पहले स्त्री बाद में पुरुष हैं। प्रभु का अर्धनारीश्वर स्वरूप बताता है कि स्त्री पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं।

उन्होंने व्यक्तित्व निर्माण में मन की भूमिका को अहम् बताते हुए कहा कि हम अपने मन के ही उत्पाद हैं। जैसा हमारा मन बोलता है, हम अपने को वैसा ही बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य की वास्तविक जड़ें धरती पर नहीं आकाश में हैं, क्योंकि हम परमात्मा के वश में हैं। हमारे आसपास जो भी है, वह मन का परिणाम है। अपनी काया खुद बुनते हैं, भोग भाग्य खुद रचते हैं।

तीनऋण उतारना जरूरी

कथाके तीसरे दिन स्वामीजी ने यज्ञोपवीत संस्कार की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि जनेऊ के तीन धागे स्मरण कराते हैं कि हमारे ऊपर तीन तरह के ऋण है, जिन्हें उतारना आवश्यक है। ये ऋण हैं, माता-पिता का, ऋषियों का और देवताओं का। हमें तीनों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, तभी इन ऋणों से मुक्ति मिल सकती है। सफल जीवन और अच्छे चरित्र निर्माण का सूत्र यह है कि हम किसी की भावनाओं को आहत करें।

रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच से भागवत कथा सुनाते स्वामी अवधेशानंद गिरी।