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बीयू करेगी बाघों का संरक्षण, पन्ना टाइगर रिजर्व से होगी शुरुआत

7 वर्ष पहले
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बरकतउल्लायूनिवर्सिटी (बीयू) बाघों का संरक्षण करेगी। बीयू के छात्र पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ के मूवमेंट वाले इलाके में सेंसर लगाएंगे। इन सेंसर की मदद से बाघों की संख्या पता करने के साथ ही शिकारियों की स्थिति का भी पता लगाया जा सकेगा। यह काम बीयू के फिजिक्स और इंजीनियरिंग विभाग के छात्र प्रोजेक्ट के तहत करेंगे। इस संबंध में वन विभाग की टीम ने हाल ही में कुलपति से मुलाकात की थी।

इस प्रोजेक्ट के लिए बीयू में दस छात्रों की टीम तैयार की जाएगी। यह छात्र पन्ना टाइगर रिजर्व में उन स्थानों पर सेंसर लगाएंगे, जहां बाघों का मूवमेंट अधिक रहता है। बाघ के मूवमेंट वाले इलाके में होने वाली गतिविधियों की सूचना इस सेंसर के माध्यम से तीन अलग स्थानों पर लगे सेटअप पर मिलेगी। यह सेटअप बीयू के साथ ही वन विभाग के हेड ऑफिस पन्ना टाइगर रिजर्व के दफ्तर में लगाया जाएगा। छात्र एक साल तक पन्ना टाइगर रिजर्व में रहेंगे।

कुलपति प्रो. मुरलीधर तिवारी के अनुसार पहले यह प्रोजेक्ट नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद में चल रहा था। उनके बीयू आने के बाद वहां यह प्रोजेक्ट बंद हो गया था। लेकिन इस प्रोजेक्ट के तहत जो राशि मिली थी, उसमें से एक करोड़ रुपए अभी भी बचे हुआ है। इसी राशि को मप्र में बाघों के संरक्षण पर खर्च करने की योजना बनाई है।



इस प्रोजेक्ट के बीयू आने के बाद इसी तरह के प्रोजेक्ट ओडिसा और उत्तर पूर्वी राज्यों में भी शुरू करने की डिमांड आयी है।