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\"नगर निगम खुद उठा रहा है कचरा और उठाने दे रहा है\'

7 वर्ष पहले
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मौलानाआजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) और नगर निगम के बीच एक बार फिर ठन गई है। मैनिट प्रबंधन ने निगम को पत्र भेजा है। इसमें लिखा है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बावजूद निगम, संस्थान के कैंपस से कचरा नहीं उठा रहा है। यदि निगम यह काम नहीं कर पा रहा तो वह मैनिट को ही कचरा डंप करने की इजाजत दे दें। इस पर निगम का कहना है कि मैनिट प्रबंधन को इसकी इजाजत देने पर विचार चल रहा है।

एनजीटी ने मैनिट के कैंपस में कचरा पड़े रहने को लेकर नगर निगम को फटकार लगाई थी। इस पर निगम ने दो सप्ताह पहले वहां से कचरा उठाया था। अब मैनिट के डायरेक्टर प्रो. अप्पू कुट्टन ने निगम के हेल्थ ऑफिसर एसपी श्रीवास्तव को पत्र भेजा है। डायरेक्टर ने भास्कर से चर्चा में आरोप लगाया कि निगम का मैनिट प्रबंधन के साथ सौतेला व्यवहार है। वह कचरा उठाने के लिए तो अपना वाहन भेज रहा है और ही प्रबंधन को कचरा उठवाने की अनुमति दे रहा है। डायरेक्टर ने बताया कि मैनिट के पास इस काम के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम है। वह निगम से केवल यह चाहता है कि वह अपने डंपिंग स्थान पर यह कचरा डालने की इजाजत दे दे।

मैनिट के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर राजेंद्र खरे का कहना है कि निगम ने मैनिट से सर्विस टैक्स तो ले लिया, लेकिन वह यहां कोई सुविधा नहीं दे रहा है। वह परिसर में घूम रहे आवारा मवेशियों को भी नहीं पकड़ रहा। जबकि इस बारे में भी संस्थान की आेर से निगम को पत्र भेजा जा चुका है।

मंजूरी देने के लिए चल रहा है विचार

^डायरेक्टरका पत्र आया है। कचरे के निपटारे के लिए मैनिट को खुद के वाहन के उपयोग की मंजूरी दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। एसपीश्रीवास्तव, हेल्थऑफिसर, नगर निगम

इसी साल निगम ने मैनिट पर 1.51 करोड़ रुपए का सर्विस टैक्स लगाया था। मैनिट प्रबंधन ने भुगतान करने से मना कर दिया। इस पर निगम ने वहां का मुख्य भवन कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की थी। हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद मैनिट को 81 लाख रुपए सर्विस टैक्स के जमा करने पड़े थे। यह मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है।

पूरे कचरे की नहीं बना सकते खाद

^निगमको पत्र लिखे दस दिन से ज्यादा हो गए हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मैनिट पूरे कचरे की तो खाद नहीं बना सकता। प्रो.अप्पू कुट्टन, डायरेक्टरमैनिट