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फ्लोर एरिया रेशो के आधार पर ही हो आश्रय शुल्क की गणना
शहरसे सटे ग्रामीण इलाकों में एलआईजी/ईडब्ल्यूएस के लिए जमीन छोड़ने पर आश्रय शुल्क जमा करने वाले प्रावधान पर बिल्डर्स की संस्था क्रेडाई ने भी आपत्ति जताई है। क्रेडाई ने मुख्य सचिव अंटोनी डिसा और मंत्रियों को पत्र लिखकर आश्रय शुल्क की गणना का तरीका बदलने की मांग की है। क्रेडाई ने आश्रय शुल्क की गणना फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के आधार पर करने के लिए कहा है। क्रेडाई ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि अभी कैबिनेट ने जो विकल्प मंजूर किया है, वह अव्यवहारिक है। इससे कम घनत्व वाले क्षेत्रों और कृषि जमीन पर कॉलोनी बनाने में जमीन की कीमत से भी ज्यादा आश्रय शुल्क देना पड़ेगा।
गौरतलब है कि पिछले बुधवार को कैबिनेट में पंचायत क्षेत्र के कॉलोनाइजर्स नियम 2014 में आश्रय शुल्क की गणना में विकल्प एक को मंजूर कर दिया गया था। इस विकल्प में जो बिल्डर अपनी कॉलोनी में छह प्रतिशत जमीन ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के लिए नहीं छोड़ना चाहता है, वह आश्रय शुल्क के रूप में प्लाॅटेबल डेवलपमेंट पर पांच हजार रुपए प्रतिवर्गमीटर के हिसाब से राशि जमा कर सकता है। इसकी दरें ज्यादा होने के कारण मंत्रियों की दूसरे विकल्प पर सहमति थी। इसमें जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन कीमत का पांच फीसदी जमा करना था। अब जबकि गफलत की वजह से कैबिनेट से मंत्रियों की इच्छा के विपरीत पहला विकल्प मंजूर हो गया है, तो क्रेडाई ने बीच का रास्ता निकालते हुए तीसरे विकल्प का प्रस्ताव दिया है। इसमें जमीन के एफएआर के छह फीसदी हिस्से पर कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से राशि की गणना की जाएगी। लिहाजा, एक बार फिर इन तीनों विकल्प पर चर्चा के बाद कोई एक विकल्प लागू किया जाएगा।
वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अब आश्रय शुल्क के तीनों विकल्प पर काम करना शुरू कर दिया है। जल्द ही इसका संशोधन प्रस्ताव लाया जाएगा।