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विदेशी बाजार तंत्र बनाते हैं सरकारी नीतियां: शंकराचार्य
भारतीयसंस्कृति को नष्ट करने का षडयंत्र सालों से चल रहा है। अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में इसका प्रारूप बनता है और इस तंत्र को क्रियान्वित करने का यंत्र बन चुके हैं देश के कुछ नेता। विदेशी बाजार तंत्र संचालित कर रहे चंद घराने भारत समेत कई देशों के लिए नीतियां बनाते है, जिन्हें सरकारें विकास के नाम पर संचालित करती है। यह बात पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कही। वे मंगलवार को गुफा मंदिर में आयोजित िवद्वत संगोष्ठी में बोल रहे थे। वे पुरी पीठ द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए तीन दिवसीय प्रवास पर यहां आए हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए देश की शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है, जिसमें भारतीय संस्कृति और सभ्यता का समावेश हो।
और लोग शिक्षित होने के साथ ही संस्कारवान बन सकें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रधानमंत्री कौन है। जब तक शिक्षा अन्य व्यवस्थाएं नहीं बदली जाएंगी, ये भी कुछ नहीं कर सकेंगे। कारण यह है कि जो भी सरकार आती है, वह एक तय प्रारूप के तहत काम करती है, जो पहले से बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यहां की सरकारों ने कभी भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
पुरी पीठाधीश्वर ने कहा कि मशीनों अन्य उपकरणों का अधिकाधिक उपयोग करने से मनुष्य की श्रम शक्ति घटती जा रही है। विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ हो रहा है। संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने किया। व्यास पीठ की पूजा संयोजक दिलीप खंडेलवाल ने की। गुफा मंदिर में बुधवार सुबह 11 से 1 बजे तक संगोष्ठी होगी।