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- \"लीगल फ्री\' नहीं होने से सात बच्चों को नहीं मिल पा रही मां की गोद
\"लीगल फ्री\' नहीं होने से सात बच्चों को नहीं मिल पा रही मां की गोद
बच्चों के लिए कोर्ट गए दावेदार
निमिशा,प्रतीक और अंश को अभी तक गोद इसलिए नहीं दिया जा सका, क्योंकि इन्हें पाने के लिए तीन दंपतियों ने मातृछाया के माध्यम से जाने के बजाय सीधे कोर्ट में आवेदन दे दिया है। वहीं, मातृछाया ने भी गोद देने की प्रक्रिया के चलते इन तीनों बच्चों के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई है। इस वजह से दो साल सेे यह मामला अटका है। मातृछाया प्रभारी अनुराग पांडेय का कहना है कि जब तक कोर्ट का निर्णय नहीं जाता, तब तक बच्चों को गोद दिए जाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।
इंतजारमें 7 साल की हो गई काबेरी
वर्ष2007 में काबेरी जब मातृछाया आई तो वह एक दिन की थी। अब वह सात साल की हो गई है। अब तक उसे गोद नहीं दिया जा सका। एक दंपती और मातृछाया की दावेदारी के कारण काबेरी का मामला कोर्ट में चला गया था। एक साल पहले उसे ऑस्ट्रेलिया के दंपती ने गोद लेने की इच्छा जताई। तब से उसे वहां भेजने की प्रोसेस चल रही है। श्री पांडेय ने बताया कि दिसंबर तक प्रोसेस पूरी हो जाएगी।
वे दंपती ही अधिकृत अनाथालय या शिशु गृहों में बच्चे गोद लेने के लिए आवेदन दे सकते हैं, जिनकी उम्र 45 वर्ष से ज्यादा हो। 250 रुपए के फॉर्म के साथ उम्र, शैक्षणिक योग्यता, विवाह, स्वास्थ्य का प्रमाण पत्र संस्था को देना होता है। उन्हें अपनी आय रोजगार के प्रमाण पत्र सहित प्रॉपर्टी बैंक बैलेंस का विवरण भी देना पड़ता है। अगले चरण में अदालत दोनों पक्षों को सुनने के बाद बच्चा गोद देने का निर्देश शिशु गृह को देती है।