वेटिंग रूम में कैसे बैठें 300 यात्री
हबीबगंजस्टेशन से शताब्दी एक्सप्रेस पकड़ने वाले यात्रियों को इस ट्रेन का इंतजार तकलीफ दे रहा है। इस स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से शताब्दी में रोजाना औसतन 300 यात्री सवार हो रहे हैं। जबकि इस प्लेटफॉर्म के तीन वेटिंग रूम की कुल क्षमता महज 170 यात्रियों की है। ऐसे में ज्यादातर यात्रियों के पास यही विकल्प बचता है कि वे प्लेटफाॅर्म की बैंच पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करें।
शताब्दी एक्सप्रेस 1 सितंबर से हबीबगंज आने लगी है। ट्रेन यहां दोपहर 2.25 बजे पहुंचती है। सोमवार की दोपहर दो बजे से ही प्लेटफाॅर्म नंबर एक के लेडीज वेटिंग रूम सहित एसी और नॉन-एसी श्रेणी के वेटिंग रूम भरने शुरू हो गए थे। महज पंद्रह मिनट में वहां की सभी सीटें भर चुकी थीं। वेटिंग रूम में कुछ यात्री खड़े-खड़े समय बिताते रहे। सिक्स सीटर बैंच पर कैपेसिटी से ज्यादा यात्री बैठे थे। यात्रियों का कहना था कि भले ही भोपाल स्टेशन से शताब्दी पकड़ने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन वहां वेटिंग रूम में जगह की दिक्कत नहीं आती थी।
इलेक्ट्रॉनिकइंक्वायरी सिस्टम नहीं
यात्रियोंने यह शिकायत भी की कि हबीबगंज के किसी भी वेटिंग रूम में ट्रेन की पोजीशन बताने वाला इलेक्ट्रॉनिक इंक्वायरी सिस्टम नहीं लगाया गया है। जिससे उन्हें ट्रेन की पोजीशन जानने के लिए बार-बार वेटिंग रूम से बाहर आना पड़ता है। इस संबंध में रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी केके दुबे का कहना है कि वेटिंग रूम की क्षमता में कुछ बढ़ोतरी तो कर दी गई है। जल्द ही कुछ सीटें और लगाए जाने की योजना है।
शताब्दी हबीबगंज से नईदिल्ली जाते समय भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर रुकती है। इस प्लेटफॉर्म पर लगे इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर अभी भी शताब्दी की चेयरकार कोच के नंबर डिस्प्ले नहीं हो रहे हैं। कुछ यात्री इस बात की शिकायत रेलवे स्टेशन प्रबंधन से कर चुके हैं। इसके बाद भी हालात जस के तस हैं।
हबीबगंज के महिला, नॉन एसी और एसी वेटिंग रूम की क्षमता क्रमश: 40, 60 और 70 यात्रियों की है। जबकि भोपाल स्टेशन में इन्हीं वेटिंग रूम में क्षमता क्रमश: 80, 125 और 130 है।