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पैसा देकर बने जेल प्रहरी, साल भर बाद हो गए गिरफ्तार

7 वर्ष पहले
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पैसा दिया तो परीक्षा में कोई और बैठा

व्यावसायिकपरीक्षा मंडल (व्यापमं), राज्य ओपन और बरकतउल्ला विवि की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अब तीन जेल प्रहरियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। तीनों आरोपी 2013 से चाचौड़ा, मुरैना और नसरुल्लागंज जेल में पदस्थ थे।

आरोपियों ने अलग-अलग दलालों को 2-3 लाख रुपए अदा कर व्यापमं की यह परीक्षा पास की थी। एसटीएफ ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। व्यापमं द्वारा आयोजित परीक्षा में हुई गड़बड़ी का यह 15 वां प्रकरण एसटीएफ ने दर्ज किया है। व्यापमं के जरिए जून 2012 को जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। तीन सौ पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 48 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हुए थे। एसटीएफ के मुताबिक कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत तरीके से नौकरी पाने की शिकायत मिली थी। जांच के दौरान तीन जेल प्रहरियों के खिलाफ एसटीएफ को पूरे साक्ष्य मिल गए हैं। इनमें मुरैना निवासी विजय त्यागी, देवेंद्र गौड़ और प्रदीप रावत शामिल हैं। एसटीएफ ने सोमवार को तीनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 471 के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

एसटीएफ के मुताबिक तीनों आरोपियों ने दलालों को 2-3 लाख रुपए दिए थे। इसके एवज में दलालों ने आरोपियों के स्थान पर परीक्षा में किसी और को बैठा दिया था। उनके जरिए अच्छे नंबरों से पास होने के बाद आरोपियों ने इंटरव्यू खुद दिया। इसके बाद प्रदीप का चाचौड़ा, विजय का मुरैना और देवेंद्र का नसरुल्लागंज जेल में चयन कर लिया गया। फिलहाल एसटीएफ उन दलालों की तलाश कर रही है, जिनके जरिए तीनों आरोपी नौकरी में लग गए।