अाखिर ऐसी गश्त िकस काम की
राजधानीमें 72 प्रतिशत वारदातें रात के समय हो रही हैं। रात दो बजे के बाद अपराधी सबसे ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। जानकार मानते हैं कि इसकी वजह पुलिस की गश्त व्यवस्था का कमजोर होना है। वे इसके पीछे अफसरों की लापरवाही को भी दोषी बताते हैं।
शक्तिनगर में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात एक बदमाश ने घर में घुसकर जनगणना निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर सतीश अय्यर और उनके बड़े भाई रमेश को चाकू के वार से घायल कर दिया था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस इलाके में पुलिस की कमजोर गश्त के चलते बदमाशों के हौसले बढ़ गए हैं। दैनिक भास्कर ने इस मसले पर आंकड़े एकत्र किए। जानकारों से बात की। इसमें सामने आया कि ज्यादातर वारदातें रात में होती हैं और पुलिस की रात्रि गश्त की व्यवस्था नाकाफी है। एसपी ऑफिस से प्राप्त लूट, चोरी, डकैती और वाहन चोरी के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई कि बदमाशों के लिए रात का वक्त सबसे मुफीद होता है।
पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा रोजाना ड्यूटी चार्ट तैयार किया जाता है। इसमें जानकारी रहती है कि पुलिस अफसरों की ड्यूटी कब और कहां लगाई गई है। रात 12 बजे से सुबह पांच बजे तक चलने वाली नाइट गश्त के लिए शहर को तीन जोन में बांटा गया है। हर जोन का प्रभार डीएसपी स्तर के अधिकारी के पास होता है। हर जोन में दो सेक्टर रहते हैं, जिनमें गश्त करने के लिए अलग-अलग थाना प्रभारी को नियुक्त किया जाता है। नाइट गश्त के दौरान तीन डीएसपी और छह टीआई तैनात किए जाते हैं। ये सभी नाइट गश्त प्रभारी एएसपी को रिपोर्ट करते हैं। सुबह छह से नौ बजे तक प्रभात गश्त की जाती है। इसके लिए शहर में एक डीएसपी स्तर का अफसर तैनात किया जाता है, जो नए और पुराने शहर में अलग-अलग प्रभात गश्त कर रहे टीआई से रिपोर्ट मांगते हैं।
वारदात कुल अंधेरा होने कितने के बाद फीसदी
डकैती 0202100 %
लूट 20413264.70 %
चोरी 116177366.58 %
वाहन चोरी 1809136775.65%