पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पुलिस रात में ही एक्शन लेती तो नहीं होता उपद्रव

पुलिस रात में ही एक्शन लेती तो नहीं होता उपद्रव

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ईरानियोंसुन्नियों के खूनी संघर्ष में राजधानी पुलिस का रवैया फिर लचर साबित हुआ है। यदि बुधवार रात को हुए संघर्ष के बाद ही पुलिस सतर्क हो जाती तो शायद कई घर उजड़ने से बच जाते। पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक कि उसका खुफिया तंत्र भी पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। बुधवार को रात में वहां कुछ पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात तो थे, लेकिन उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लगी कि सुन्नी समुदाय के लोग ईरानियों पर हमले की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस की इसी सुस्ती का लाभ उठाकर उपद्रवी एक-एक कर जुटते गए और 500 लोगों की भीड़ गुरुवार सुबह 9 बजे डंडे तलवार लेकर सड़कों पर उतर आई। उसी कॉलोनी में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों ने कॉलोनी की घेराबंदी की और फिर घरों में आग लगा दी।

सबकुछउजड़ा, अब वहां कैंप करेगा प्रशासन

करीबतीन दर्जन घर उजड़ने के बाद पुलिस और प्रशासन जागे। अधिकारियों ने घटनास्थल के पास कैंप कर लिया है। यहां पूरे इलाके में हैलोजन की रोशनी की गई है। क्यूआईटी और आरएएफ के अलावा जिला पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर जमे हुए हैं।

...और बचाव की मुद्रा में आए अफसर

^पुलिस केमुकाबले उपद्रवी बहुत ज्यादा थे। विवाद दोबारा शुरू होने का पता चलते ही फोर्स पहुंच गया और हालात काबू में गए। हमने कम समय में अच्छा रिएक्शन दिया है। चूक तो हुई ही नहीं। उपद्रवियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डी.श्रीनिवास वर्मा, डीआईजी

^यह सहीहै कि उस वक्त इलाके में पुलिस बल तैनात था लेकिन उपद्रवियों ने संगठित होकर वारदात को अंजाम दिया। यदि पुलिसकर्मी वहां नहीं होते तो हालात और खराब हो सकते थे। पुलिस ने उपद्रवियों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े। उपद्रवियों की संख्या के अनुपात में सरकारी अमला कम था। इसलिए हालात बिगड़े। निशांतवरवड़े, कलेक्टर