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आश्रय शुल्क : विभागीय मंत्री अफसरों के बीच नहीं है सहमति
शहरसे सटे 16 किमी के क्षेत्र में कॉलोनी निर्माण की अनुमति लेने पर राज्य शासन द्वारा लगाए गए आश्रय शुल्क की दरों को लेकर अफसरों मंत्रियों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। अफसर आश्रय शुल्क की दरों के निर्धारण वाला विकल्प एक लागू करने पर ही राजी हैं, जबकि मंत्री विकल्प दो को चाहते हैं।
लिहाजा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने विभाग के अफसरों को दोनों ही विकल्पों की दरों का परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में कैबिनेट ने पंचायत क्षेत्र के कॉलोनाइजर रूल्स 2014 को हरी झंडी दी थी। इसमें मंत्री जिस प्रस्ताव की मंजूरी चाहते थे, वह अफसरों ने कैबिनेट में रखा ही नहीं था। इसलिए आश्रय शुल्क की ज्यादा दरों वाला नियम पास हो गया है। इस गफलत को दूर करने के लिए पहले वित्त मंत्री जयंत मलैया और अब विभागीय मंत्री ने भी बिल्डरों की आपत्ति वाले पत्र पर कार्रवाई के लिए अफसरों को लिखा है। विकल्प एक में प्लाटेबल डेवलमेंट पर 5000 रुपए प्रति वर्गमीटर का और विकल्प दो में कलेक्टर गाइडलाइन की छह फीसदी राशि रखी गई है।
^मैंने अफसरों को हर पहलू का परीक्षण करने के लिए कहा है। विकल्प एक या दो में कौन-सा सही है, अभी मैं नहीं बता सकता हूं। जल्द ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।\\\'\\\' गोपालभार्गव, मंत्री,पंचायत एवं ग्रामीण विकास
^विकल्प एक ही सही है। दिक्कत लो डेंसिटी वाली जमीन पर है। यदि जमीन की कीमत 15 करोड़ रुपए है तो 30-40 लाख रुपए आश्रय शुल्क दिया जा सकता है।\\\'\\\' अरुणाशर्मा, एसीएस,पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग