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सीएम ने विधायकों से पूछा- क्या फिर शुरू करें 8 घंटे की बिजली कटौती
भाजपाविधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधायकों से पूछा कि बिजली की स्थिति बिगड़ती जा रही है। या तो सख्ती से बिजली के बिल की वसूली होगी या 8 घंटे की कटौती फिर शुरू करनी पड़ेगी। विधायक बताएं कि क्या करना चाहिए? मुख्यमंत्री ने विधायकों से यह यह भी कहा कि इसकी चर्चा बाहर करें। बैठक गुरुवार को सीएम निवास में हुई। इससे पहले ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बिजली और कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन सहकारिता मंत्री गोपाल भार्गव ने खाद की स्थिति को लेकर प्रजेंटेशन दिया। वित्तमंत्री जयंत मलैया ने वित्तीय व्यवस्थाओं पर सफाई दी।
बैठक में चौहान ने विधायकों से यह भी कहा कि विधानसभा में मंत्रियों और सरकार के खिलाफ बोलने के कारण जनता में अच्छा मैसेज नहीं जा रहा। कांग्रेस के विधायक तो आरोप लगाते हैं, जब भाजपा के विधायक भी ऐसा करेंगे तो जनता उसे सही मान लेगी। कुछ विधायक तो लगातार सरकार को घेर रहे हैं। वे नहीं जानते कि जिस डाल पर बैठे हैं, उसे ही काट रहे हैं। नेता (शिवराज सिंह) सरल हो तो उसका फायदा नहीं उठाना चाहिए। मंत्री से कुछ कहना है तो कमरे में जाकर बात करें। इस पर विधायकों ने कहा कि सत्र के आखिर में ही क्यों बैठक होती है। इससे सत्र के पहले किया जाना चाहिए। बैठक के दौरान बिसेन ने कहा कि खाद की कमी की वजह केंद्र सरकार से पर्याप्त खाद का मिलना है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि धान की तरह इस बार समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं पर भी बोनस नहीं देंगे। आने वाले पंचायत चुनाव पर उन्होंने कहा कि विधायक इसमें टिकट को लेकर कुछ बोलें।
बैठक के दौरान कुछ विधायकों ने अपनी बात रखनी चाही तो मुख्यमंत्री ने उन्हें रोक दिया। साथ ही कहा कि वे ऊर्जा मंत्री को अपनी बात लिखकर दे दें। मुख्यमंत्री ने फिर दोहराया कि हर विधायक का व्यक्तिगत सर्वे कराया जाएगा। यह भी आंकलन होगा कि क्षेत्र में उसकी स्थिति क्या है? बैठक में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन मौजूद नहीं थे। प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान भी भोजन के समय पहुंचे।
गेहूं पर भी नहीं देंगे बोनस
विधायकों को बोलने से रोका