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भोपाल स्टेशन पर डिस्प्ले सिस्टम की खामी ने ली रिटायर्ड रेलकर्मी की जान

6 वर्ष पहले
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भोपालरेलवे स्टेशन पर कोच डिस्प्ले सिस्टम की खामी ने रेलवे के एक रिटायर्ड क्लर्क की जान ले ली। सोमवार शाम को उन्हें हबीबगंज-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस से परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्यों के साथ दिल्ली जाना था। जहां कोच नंबर दो का डिस्प्ले था, वहां कोच नंबर सी-11 आकर रुका। इससे हुई गफलत में सभी बुजुर्ग सामान लेकर कोच नंबर दो की ओर दौड़ने लगे। तभी ट्रेन चल दी। जल्दबाजी में रिटायर्ड क्लर्क दीनदयाल माथुर दूसरे कोच में सवार होने लगे। इसी दौरान उनका पैर फिसला और वे गिरकर ट्रेन की चपेट में गए।

गाजियाबाद में रहने वाले 74 वर्षीय दीनदयाल माथुर अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने भाई राकेश और अपने परिवार को लेकर 7 फरवरी को भोपाल आए थे। रविवार को शादी समारोह संपन्न हुआ। सोमवार को सभी को हबीबगंज-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली होते हुए गाजियाबाद लौटना था। उनके भाई राकेश दयाल का परिवार समेत कोच नंबर नौ में रिजर्वेशन था। जबकि दीनदयाल, उनकी प|ी अंबा और भाभी तारा माथुर का रिजर्वेशन कोच नंबर दो में था।

राकेश माथुर ने बताया कि उनके भाई दीनदयाल प्लेटफॉर्म नंबर दो पर कोच नंबर दो शो कर रहे डिस्प्ले के नीचे खड़े थे, लेकिन जब गाड़ी आई तो उनके सामने कोच नंबर सी-11 आकर रुका। इससे परिवार के सभी सदस्य घबरा गए और कोच नंबर सी-टू ढूंढने के लिए दौड़ने लगे। इसी बीच ट्रेन चल दी। जल्दबाजी में दीनदयाल दूसरे कोच में सवार होने लगे। तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे ट्रेन की चपेट में गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

आजहोगा पोस्टमार्टम

हादसेकी सूचना पर जीआरपी भोपाल की टीम मौके पर पहुंची। 108 एंबुलेंस को भी बुलाया गया। कानूनी कार्रवाई करने के बाद पुलिस ने श्री माथुर का शव निजी एंबुलेंस से पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।

इलस्ट्रेशन : गौतम चक्रवर्ती

दीनदयाल माथुर

1-प्लेटफॉर्म नंबर दो पर शाम करीब साढ़े चार बजे दीनदयाल माथुर कोच दो के डिस्प्ले बोर्ड के पास पहुंचे।

2-लेकिन यहां शताब्दी का सी-11 कोच आने से उन्होंने सी-टू की ओर दौड़ लगाई। इसी बीच ट्रेन चल पड़ी।

3- हड़बड़ी में श्री माथुर गिरे और ट्रेन की चपेट में गए।

पति की अचानक मौत से श्री माथुर की प|ी अंबामाथुर सदमेमें हैं। उनकी आंखों के आंसू नहीं थम रहे हैं। वे हादसे के बारे में सोचकर बार-बार फफक पड़ती हैं। देवर राकेश ने उनके बेटे प्रदीप से मोबाइल फोन पर बात करवाई तो वे बस यही कह पाईं कि ‘खुशी में शामिल होने आए थे, लेकिन यहां जिंदगीभर का दुख मिल गया।

श्री माथुर की भाभी तारामाथुर काआरोप है कि हादसा रेल मंडल की लापरवाही से हुआ है। उनका कहना है कि पहले स्टेशन पर कोच नंबर सही डिस्प्ले होते थे, लेकिन सोमवार को बोर्ड पर गलत जानकारी डिस्प्ले हुई थी। डिस्प्ले यदि खराब होते तो हम मान लेते, लेकिन जहां कोच नंबर दो डिस्प्ले किया जा रहा है, वहां शताब्दी का कोच 11 कैसे रुका?