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प्रैक्टिकल के नाम पर मैनिट में हो रही महज खानापूर्ति

7 वर्ष पहले
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मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के छात्र वहां की व्यवस्थाओं से नाखुश हैं। उनका कहना है कि संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रैक्टिकल कराने के लिए लैब में नहीं आते हैं। इसके लिए वे एमटेक के छात्रों या रिसर्च स्कॉलर्स को भेज देते हैं। लैब के ज्यादातर उपकरण खराब हैं और वहां प्रैक्टिकल के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। वहां के हॉस्टल, लायब्रेरी और डिस्पेंसरी में भी अव्यवस्थाओं का आलम है।

छात्रों ने यह आरोप वहां तीन दिन के दौरे पर शनिवार को पहुंची नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (एनबीए) की टीम के सामने लगाए। 11 सदस्यीय यह टीम संस्थान का मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। टीम ने छात्रों से बंद कमरे में बात की। इस दौरान संस्थान के किसी भी स्टाफ को वहां आने की अनुमति नहीं थी। टीम छात्रों से जानना चाहती थी कि संस्थान की व्यवस्थाएं कैसी हैं? वहां के प्रोफेसर कैसा पढ़ाते हैं?

टीम द्वारा निरीक्षण की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी करायी गई। लेकिन पूर्व और वर्तमान छात्रों के साथ हुई चर्चा के दौरान फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर को बाहर ही रखा गया। संस्थान के डायरेक्टर प्रो. अप्पू कुटटन के अनुसार टीम रविवार को दिल्ली के लिए रवाना होगी। उनका कहना है कि टीम ने जो भी फीडबैक छात्रों से लिया है उसकी जानकारी फैकल्टी और अन्य अधिकारियों को नहीं है। टीम ने केवल सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्युनिकेशन जैसी कोर ब्रांच का ही फीडबैक लिया है।