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5 करोड़ के कैमरों से भी नहीं सुधरे हालात

7 वर्ष पहले
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पांचकरोड़ की लागत से 104 स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए काटे गए चालान में महज 24 फीसदी वाहन चालकों से ही वसूली हो पाई है। एक साल में ट्रैफिक पुलिस ने 19,300 चालान काटे हैं। हालांकि, पुलिस का तर्क है कि बचे हुए वाहन चालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बीते साल तीन अक्टूबर को पूर्व गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने पुलिस कंट्रोल रूम के पास बने सिटी सर्विलांस सिस्टम का शुभारंभ किया था। चार करोड़ 94 लाख की लागत से शहर में 421 कैमरे लगाए गए। उस समय कहा गया था कि इनकी मदद से अपराधियों की धरपकड़ में आसानी होगी। साथ ही ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों पर भी नजर रखी जा सकेगी। पुलिस ने इन कैमरों से मिली तस्वीरों को देखकर चालान तो खूब काटे, लेकिन समन शुल्क वसूली में अच्छे परिणाम नहीं दे पाई। नतीजा यह रहा कि चालान काटे जाने के बाद भी उन लोगों को गलती का अहसास नहीं हुआ, जिनकी तस्वीरें ट्रैफिक नियम तोड़ते कैमरे में कैद हुई थीं।

> नो पार्किंग में खड़े वाहन > तीन सवारी, बिना हेलमेट वाहन चलाना > जेब्रा क्रॉसिंग या रेड लाइट पार करना > संदिग्ध गतिविधि करने वालों के मूवमेंट पर नजर > एक्सीडेंट या कोई अपराध कर भागने वाले वाहनों के मूवमेंट पर नजर।

सिस्टम के तहत ऐसे 250 लोगों के पते पर चालान भेज दिया गया, जो कार्रवाई के दौरान मौजूद ही नहीं थे। इसमें वे लोग भी हैं, जिन्होंने अपने वाहन को किसी और को बेच दिया है। लेकिन, उन्होंने वाहन को नए खरीदार के नाम से ट्रांसफर नहीं किया।

बैरागढ़, लालघाटी चौराहा, बोर्ड ऑफिस चौराहा, राजभवन तिराहा, पुलिस कंट्रोल रूम तिराहा, जिंसी चौराहा, पत्रकार भवन तिराहा, पीएचक्यू तिराहा, शब्बन चौराहा, 6 नंबर मार्केट, 10 नंबर मार्केट, मनीषा मार्केट, व्यापमं चौराहा, बिट्टन मार्केट, नेहरू नगर चौराहा, रोशनपुरा चौराहा, टीटी नगर क्रॉस तिराहा, अपेक्स बैंक चौराहा, जवाहर चौक चौराहा, कोलार तिराहा, ज्योति चौराहा, नादरा बस स्टैंड चौराहा और भोपाल टॉकीज चौराहा। इन स्थानों पर ज्यादा भीड़ रहती है, इसलिए यहां कैमरों की मदद से खास नजर रखी जाती है।

सीसीटीवी कैमरों के लिए बनाए कंट्रोल रूम में निगरानी करते पुलिसकर्मी।