गुरु-शिष्याओं ने किया \"नर्मदाष्टक\'
शहरमें रविवार की शाम शास्त्रीयता को प्रदर्शित करते दो अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। एक प्रस्तुति में गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन देखने को मिला तो दूसरी में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी सभा लगी। यह दोनों प्रस्तुतियां मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय (श्यामला हिल्स) में संस्कृति संचालनालय की ओर से आयोजित ‘उत्तराधिकार’ कार्यक्रम शृंखला के अंतर्गत हुईं। शास्त्रीय गायन और नृत्य की इस सभा में शहर के कलारसिक काफी संख्या में उपस्थित हुए।
जनजातीय संग्रहालय के मंच पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति देतीं
शहर की नृत्यांगनाएं।
शास्त्रीय गीतों की प्रस्तुति देते शासकीय संगीत महाविद्यालय, मंदसौर के कलाकार।
गायन और नृत्य की सभा
कार्यक्रम की शुरुआत शासकीय संगीत महाविद्यालय, मंदसौर के शास्त्रीय गायक देवेंद्र कुमरे ने शास्त्रीय गायन से की। उनके साथ तबला पर निशांत शर्मा और हारमोनियम पर अतुल साकेत ने संगत दी। देवेंद्र ने भक्ति पद ‘भज हरि नाम...’ राग यमन में बड़ा खयाल विलंबित तीन ताल में और छोटा खयाल में ‘शिव शंकर शंभु महादेव...’ को तीन ताल में प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना डाॅ. लता सिंह मुंशी ने अपनी शिष्याओं के साथ भरतनाट्यम नृत्य शैली में पारंपरिक मंगलाचरण मल्लारी की शानदार प्रस्तुति दी। इसके बाद समूह नृत्य के जरिए वसंत ऋतु का मनमोहक चित्रण प्रस्तुत किया। नर्मदाअष्टक और तिल्लाना से उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन किया।
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