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इनकी साइकिलिंग में छिपे कई मैसेज

7 वर्ष पहले
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शहरकी सड़कों पर फर्राटा भरती टू और फोर व्हीलर्स के बीच साइकिल पर घूमतीं बिंदास और अपनी मस्ती में मस्त दो लड़कियां बरबस ही लोगों का ध्यान खींच लेती हैं। जर्मनी से आईं 19 साल की एली और 20 साल की जेनी शहर के स्लम एरियाज के बच्चों को एजुकेशन दे रही हैं। दोनों छोटे-बड़े कामों के लिए बाइक या कार के बजाय साइकिल का इस्तेमाल करती हैं। वे लोगों को साइकिल चलाकार फिट रहने और एन्वायरनमेंट के प्रति अवेयर कर रही हैं।

भोपाल की तहजीब और भारत की संस्कृति की कायल हैं दोनों

एली बताती हैं कि \\\"भोपाल में साइकिलिंग करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। हां, राह चलते लोग हमें हैरानी से जरूर देखते हैं, लेकिन इस बात का उन्हें बुरा नहीं लगता।\\\" वहीं, जेनी कहती हैं, \\\"भारत की संस्कृति काफी अलग और खूबसूरत है। इसकी हर एक बात मुझे अच्छी लगती है।\\\" दोनों भारतीय संस्कृति खासकर भोपाल की तहजीब को पसंद करती हैं। इसलिए वे यहां के रंगरूप में ढलने लगी हैं। यहां के कल्चर से प्रभावित होकर वे पायल, बिंदी जैसी सामग्री कैरी करने लगी हैं। धीरे-धीरे उन्हें इंडियन फैशन कंफर्टेबल भी लगने लगा है।

क्यों खरीदी साइकिल

जेनी ने बताया कि उन्हें यहां की ट्रांसपोर्ट सर्विस काफी महंगी लगी। उन्होंने एक पुरानी साइकिल खरीदी। इसे फेवरेट कलर में रंगा और एक्सेसरीज लगाकर चलाने लायक बनाया। एनी और जेनी एक ही साइकिल से स्लम एरियाज के बच्चों को पढ़ाने जाती हैं। वे शॉपिंग या आउटिंग के लिए भी साइकिल का ही यूज करती हैं।

तीन अहम संदेश

1 . साइकिल चलाएं, पर्यावरण बचाएं।

2 . साइकिल चलाएं, सेहत बनाएं।

3 . साइकिल चलाएं, खर्च कम करें।