ऐसे करते हैं इन्वेस्टिगेशन
वेट्रन इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के राहुल ने बताया कि प्री मेट्रिमोनियल इन्वेस्टिगेशन के लिए क्लाइंट से मेट्रिमोनियल साइट पर दी गई लड़का-लड़की की जानकारी ली जाती है या फिर क्लाइंट उस परिवार का पता और लड़का-लड़की की फोटो देता है, जिससे वे अपने बेटा-बेटी की शादी करना चाहते हैं। इसके बाद इन्वेस्टिगेशन शुरू की जाती है। इसमें संबंधित परिवार का सोशल स्टेटस, फैमिली बैकग्राउंड, एजुकेशनल डिटेल, क्रिमिनल रिकाॅर्ड, इनकम और फाइनेंशियल पोजीशन, पिछले 10 साल का एम्प्लायमेंट रिकाॅर्ड, लड़का-लड़की और उसके परिवार के लोगों की बैड हैबिट, पर्सनल डिटेल जिसमें लड़का या लड़की की पूर्व शादी और अफेयर्स सहित अन्य डिटेल निकाली जाती है।
{केस-2 शाहपुरानिवासी एयर होस्टेस सुजल की शादी खुद को व्यवसायी बताने वाले जयपुर निवासी महेश मीणा से होनी थी। दोनों में प्रेम प्रसंग था। फिर भी सुजल के चाचा ने पड़ताल कराई तो पता चला कि महेश ने अपने विषय में सबकुछ झूठ बोला था। सारा व्यवसाय उसके दोस्त का था।
{केस-1 भोपालके एक आईपीएस अफसर ने अपनी बेटी की शादी करने से पहले तीन लड़कोंं के परिवार की जासूसी कराई। जासूस ने तीनों लड़कों और उनके परिवार की जानकारी लाकर दी। इसके बाद उन्होंने उनमें से एक लड़के को चुनकर दिसंबर 2014 में बेटी की शादी कर दी।
{केस-3 अरेराकॉलोनी निवासी अलका श्रीवास्तव की शादी अमित श्रीवास्तव से हुई थी। अमित की दो शादी पहले ही टूट चुकी थीं, जिसकी जानकारी शादी के बाद लगी। मामला तलाक तक पहुंच गया। इसके बाद उनके परिवार ने अन्य शादियों से पहले डिटेक्टिव एजेंसी का सहारा लिया है।