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सर्वे हुआ, रिपोर्ट बनी, 7 दिन बाद बढ़ा देंगे कीमत

7 वर्ष पहले
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कलेक्टरगाइडलाइन के तहत प्रॉपर्टी की कीमतें तय करने का काम शुरू हुए डेढ़ महीने गुजर चुके हैं। लेकिन इसके लिए तो कोई सर्वे हुआ, ही कोई रिपोर्ट बनी है। 7 मार्च से पहले उपमूल्यांकन समिति को रिपोर्ट देनी है जबकि राजस्व पंजीयन अफसरों ने अब तक क्रेडाई से संपर्क ही नहीं किया है। यह हाल तब है, जब पिछले साल अफसरों को मनमर्जी से कीमतें तय करने पर दोबारा मैदानी सर्वे करना पड़ा था। इसके बाद प्रस्तावित कीमतों में कमी की गई थी।

एक-दो दिनों में उपमूल्यांकन समिति की एक और बैठक होगी। इस बैठक में पंजीयन राजस्व अफसरों को जमीन की खरीद-बिक्री की रिपोर्ट और कीमत का भी ब्यौरा पेश करना होगा। अहम बात यह है कि जब मैदानी सर्वे ही नहीं हुआ तो फिर अफसर किस आधार पर कीमतें तय करेंगे। रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि राजस्व पंजीयन अफसरों ने अब तक उनसे संपर्क ही नहीं किया है।

20मार्च तक भेजनी होगी अंतिम रिपोर्ट

दावे-आपत्तिके निराकरण के बाद जिला मूल्यांकन समिति को 20 मार्च तक कीमतों का अंतिम प्रस्ताव तैयार करना होगा। यह प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ही प्रस्तावित कीमतों पर अंतिम मुहर लगाएगी। एक अप्रैल 2015 से बढ़ी हुई कीमतों पर ही प्रॉपर्टी की कीमत आंकी जाएगी। बढ़ी कीमतों पर ही रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी देनी होगी।

लक्जरी फ्लैट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी

प्रस्तावितगाइडलाइन में लक्जरी फ्लैट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए अपार्टमेंट की सुविधाओं को आधार बनाया जाएगा। अफोर्डेबल फ्लैट्स यानी 10 लाख तक की कीमत के एलआईजी फ्लैट्स की कीमतें बढ़ाने पर पंजीयन अधिकारी चुप्पी साधे हैं। वजह यह है कि राज्य सरकार ने बजट में एलआईजी के लिए भी स्टांप ड्यूटी फ्री कर दी है। ऐसे में इन फ्लैट्स पर स्टांप ड्यूटी बढ़ाने से सरकार को राजस्व नहीं मिलेगा।

डेढ़ महीने बीते लेकिन आरआई, पटवारी ने नहीं किया मैदानी सर्वे

इस बार सबसे ज्यादा फोकस कोलार, बर्रई, कटारा, भौंरी सहित बाहरी क्षेत्र हैं। सूत्रों का कहना है कि इन क्षेत्रों में कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी संभव है। तर्क यह है कि इन क्षेत्रों में बीते सालों में तेजी से विकास हुआ है। अब यह हिस्सा नगर निगम के दायरे में शामिल है। इसके अलावा होशंगाबाद रोड, मिसरोद, बावड़ियाकला, रायसेन रोड पर भी ज्यादा खरीद-बिक्री की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यहां भी कीमतों में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है लेकिन इसके लिए अब तक कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं है।





उपमूल्यांकन समिति के सदस्यों को आपत्तियों के निराकरण के समय यह बताना होगा कि वहां कीमतें क्यों बढ़ाई गई हैं? इस बार हर आपत्ति के निराकरण की रिपोर्ट तैयार होगी। जिला मूल्यांकन समिति में भी इस पर चर्चा होगी।

{क्या करना था- रियलएस्टेट कारोबारियों से कीमतों का आकलन।

क्याकिया- अबतक क्रेडाई के पदाधिकारियों से अफसरों ने संपर्क ही नहीं किया। उनसे विज्ञापन के ब्रोशर लिए गए, ही कीमत के विषय में जानकारी जुटाई गई। शहर के हर प्रॉपर्टी फेयर की जानकारी एकत्र की।

{क्याकरना था- मैदानीसर्वे।

क्याकिया- राजस्वनिरीक्षकों पटवारियों के अलावा पंजीयन अफसरों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कीमतों का मैदानी सर्वे करना था। अब तक यह काम शुरू नहीं किया।

{क्याकरना था- राजस्वपंजीयन की अलग-अलग रिपोर्ट।

क्याकिया- कीमतोंके संबंध में राजस्व पंजीयन अफसरों को अलग-अलग प्रतिवेदन तैयार करने थे। यह प्रतिवेदन उनके मैदानी सर्वे के आधार पर तैयार होना था। जब सर्वे ही नहीं हुआ तो फिर प्रतिवेदन मनमर्जी से तैयार होगा।

क्रेडाई से संपर्क ही नहीं किया

^अफसरोंने अब तक क्रेडाई के पदाधिकारियों से कीमतों के संबंध में कोई जानकारी नहीं ली है, फिर कैसे रेट तय हो सकते हैं। सरकार को चाहिए कि स्टांप ड्यूटी से मिलने वाले राजस्व का लक्ष्य बढ़ाए। राजस्व लक्ष्य बढ़ाने से ही कीमतें बढ़ती है। इस बार सरकार ने लक्ष्य चार हजार करोड़ से बढ़ाकर 4700 करोड़ कर दिया है। मनोजसिंह मीक, प्रवक्ता, क्रेडाई

हम आरटीआई से मांगेंगे रिपोर्ट

^हमनेशहर के अलग-अलग हिस्सों में पता किया है कि वहां कोई मैदानी सर्वे नहीं हुआ। ही राजस्व निरीक्षकों पटवारियों ने इस संबंध में कोई रिपोर्ट तैयार की है। यदि मनमानी कीमतें तय हुई तो हम आरटीआई में पूरी रिपोर्ट मांगेंगे। अफसर चेंबर में बैठकर मर्जी से कीमतें तय कर रहे हैं। अजयअग्रवाल, अध्यक्ष, जिला मूल्य वृद्धि विरोध समिति