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सुरीली बंदिशों और रागों का पर्व

7 वर्ष पहले
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भारतभवन में आयोजित गायन पर्व का समापन रविवार को शास्त्रीय और उपशास्त्रीय गायन के साथ हुआ। इसमें पारंपरिक बंदिशों की सुरमयी प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम में पावन नवरात्रि पर्व के अवसर पर उपशास्त्रीय गायिका वंदना मिश्रा ने गायन की शुरुआत मां जगदंबे के गीतों से की। उन्होंने राम जन्मभूमि अयोध्या की मिट्टी की सौंधी महक बिखेरते हुए ‘राम जन्मोत्सव’ गीत सुनाया। इसी क्रम में शास्त्रीय गायिका गौरी पठारे ने राग मारवाह और राग भूप से सुर साधना की। गायिका गौरी ने अपनी अलग शैली में बंदिशें प्रस्तुत कीं। श्रोता शास्त्रीय गायन की इस प्रस्तुति को बड़ी तन्मयता से सुनते रहे। संगीत की इस सुरीली बानगी में कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने श्रोताओं को शास्त्रीय गायिकाओं और उनकी संगीत विरासत से परिचय कराया। गायन पर्व की समापन बेला में सुर संध्या की शुरुआत गायिका वंदना मिश्रा ने भक्तिगीत से की। उन्होंने राम जन्म गीत ‘जन्मे अवध रघुरइया...’ की प्रस्तुति दी।

राग मारवाह में की सुर साधना

शास्त्रीय गायिका गौरी पठारे ने संगीत संध्या को शास्त्रीय गायन शैली के रस से सराबोर कर दिया। उन्होंने राग मारवाह में सुरों को साधा। उन्होंने पहली प्रस्तुति राग झूमरा में निबद्ध पारंपरिक बंदिश ‘पिया मोरे आवत देश...’ की दी। वहीं, अगली प्रस्तुति में उन्होंने तीन ताल में निबद्ध रचना ‘मोरा दिल तुम्ही संग लागे...’ सुनाया। इस प्रस्तुति में हारमोनियम पर विवेक बंसोड़ और तबले पर रामेंद्र सोलंकी ने संगत की।