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िबल्डिंग परमिशन की फाइलें गुम

7 वर्ष पहले
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नगरपालिका कोलार में वर्ष 2009-2013 तक की बिल्डिंग परमिशन की जांच कर रही ईओडब्ल्यू को महज 19 प्रकरणों की फाइल ही मिल पाई है। टीम 25 प्रकरणों के दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। दो दिन की कार्रवाई के बाद टीम ने इन फाइलों को छिपाए जाने का शक जताया है।

नगर निगम में कोलार नगर पालिका के विलय के बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने शनिवार दोपहर को गेहूंखेड़ा स्थित उसके दफ्तर में छापा मारा था। नगर पालिका में बिल्डिंग परमिशन, कॉलोनियों के हस्तांतरण और अन्य प्रमाण पत्रों में अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद टीम ने यह कार्रवाई की थी। करीब सात घंटे चली कार्रवाई के दौरान टीम ने यहां से कुछ मामलों का रिकॉर्ड भी जब्त किया था। बाकी रिकॉर्ड जब्त करने के लिए निरीक्षक अनिल गोहा के नेतृत्व में टीम सोमवार दोपहर भी नगर पालिका दफ्तर में पहुंची। दो दिन की कार्रवाई के बाद टीम ने यहां से कुल 19 मामलों का रिकॉर्ड जब्त कर लिया है।

सीएमओ के चैंबर में फाइलों की जांच करती ईओडब्ल्यू की टीम।

छह घंटे तक सर्चिंग, प्रक्रिया भी जानी

सोमवार दोपहर करीब एक बजे कोलार नगर पालिका दफ्तर पहुंची टीम ने शाम सात बजे तक सर्चिंग की। निरीक्षक अनिल गोहा के मुताबिक टीम ने वहां स्टाफ से बिल्डिंग परमिशन और कालोनियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को भी समझा। टीम ने यह भी समझा कि फाइलें क्यों गुम हैं ? इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल टीम जब्त किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। इसमें सामने आई गड़बड़ियां उजागर होने के बाद संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शाम पांच बजे तक नहीं पहुंचे पूर्व सीएमओ

टीमने सीएमओ सत्येंद्र सिंह धाकरे, उप राजस्व निरीक्षक श्रीराम पटेल और दीपक श्रीवास्तव से भी पूछताछ की। इनके अलावा पूर्व सीएमओ राजेश श्रीवास्तव को फोन कर फाइलों के बारे में पूछा। टीम ने उन्हें मंडीदीप नगर पालिका से कोलार नगर पालिका दफ्तर आने के लिए कहा, लेकिन श्रीवास्तव एक घंटे में आने का कह कर शाम सात बजे तक भी कोलार नपा दफ्तर में नहीं पहुंचे।