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आंकड़ों में हेराफेरी से कम किए एससी के वार्ड
गड़बड़ियां
वार्ड परिसीमन
नगरनिगम का क्षेत्र बढ़ गया। वार्ड बढ़ गए। कुल आबादी बढ़ गई, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आरक्षित तबके की आबादी कम हो गई। यह गड़बड़ी हाल ही में जारी वार्ड परिसीमन में हुई है। इसके चलते आरक्षण में अनुसूचित जाति के दो वार्ड कम हो रहे हैं। यही नहीं, परिसीमन में भी वार्ड की सीमाएं अजीबोगरीब तरह से रखी गई हैं। परिसीमन प्रस्ताव गलतियों का पुलिंदा हो गया है। नतीजतन तीन दिन में ही 48 आपत्तियां चुकी हैं। कांग्रेस भाजपा दोनों के ही पार्षद परेशान हैं अौर परिसीमन पर सवाल उठा रहे हैं।
दैनिकभास्कर केपास मौजूद जनगणना 2011 के आंकड़ों में निगम के मौजूदा 70 वार्डों में ही एससी की 2,42,103 आबादी दर्ज है। लेकिन प्रशासन द्वारा किए गए परिसीमन के बाद आबादी घटकर 2,28,204 रह गई है। यह स्थिति तब है जबकि निगम के क्षेत्र में 127 वर्ग किमी का इजाफा हुआ है। इस बढे़ हुए क्षेत्र की आबादी का वर्गीकरण भास्करकेपास उपलब्ध है, जिसमें एससी की आबादी 2.62 लाख होनी चाहिए थी। इससे एससी की आबादी का प्रतिशत भी 13.68 से घटकर 11.86 रह गया है। इसी प्रतिशत पर एससी के वार्डों का आरक्षण होता है। अभी 11.86 फीसदी के हिसाब से से 10 वार्ड आरक्षित हो रहे हैं, जबकि 13.68 फीसदी के हिसाब से 12 वार्ड। उधर, कांग्रेस ने भी जिला प्रशासन पर आंकड़ों में हेराफेरी का आरोप लगाया है।
3. भाजपा परिसीमन को लेकर बेहद सक्रिय। आरोप है कि भाजपा नेताओं ने वोट बैंक के हिसाब से परिसीमन करवाया। इसके चलते आंकड़ों में गड़बड़ी की गई।
2. निगम के पास वक्त कम था। महज पांच दिनों में निगम ने यह प्रस्ताव तैयार कर लिया, जबकि पिछले चुनावों में निगम को इसी कवायद में 3 महीने लगे थे।
यह फायदा मिला
वार्डनंबर 55 और 25 अभी आरक्षण से बाहर हो गए हैं। यह भाजपा के सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए मुफीद हैं। यानी भाजपा को दो वार्ड का सीधा फायदा है।
1. नगर निगम के कर्मचारियों ने परिसीमन प्रस्ताव तैयार किया है। उन्होंने गूगल मैप के आधार पर वार्ड सीमाएं तय कर दीं। इसमें जनसंख्या के जिन ब्लॉकों को लिया गया, वे इसमें फिट नहीं बैठ पाए।
परिसीमन प्रस्ताव पर अब तक 48 आपत्तियां
भोपाल|नगरनिगमके परिसीमन के प्रस्ताव पर बुधवार को अब तक सबसे ज्यादा 34 आपत्तियां आईं। इससे पहले 14 आपत्तियां आई थीं। परिसीमन प्रस्ताव पर अब तक कुल 48 आपत्तियां दर