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सड़क हादसे में बच्चे की मौत पर होगी सात साल की जेल

7 वर्ष पहले
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इलाज से इनकार किया तो लगेगा जुर्माना

प्रदेश के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों को अब हर हाल में मरीज का इलाज करना होगा। मरीज को बिना इलाज दिए अस्पताल से लौटाने वाले डॉक्टर पर राज्य सरकार जुर्माना लगाएगी। इसके लिए सरकार 2 अक्टूबर से अपने अस्पतालों में स्वास्थ्य गारंटी योजना लागू करने जा रही है। इसके तहत सभी सरकारी अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पतालों में मरीजों की 30 प्रकार की जांचें 24 घंटे की जाएंगी।

सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी यूनिट में सबसे ज्यादा परेशानी हार्ट अटैक और सड़क हादसों के शिकार लोगों को होती है। इसकी वजह अस्पतालों में ओपीडी के बाद सोनोग्राफी, एक्सरे, ईसीजी, ब्लड टेस्ट, कल्चर टेस्ट की सुविधा होना है। शेष| पेज 8 पर



इसस्थिति में सरकारी अस्पतालों से मरीज निजी अस्पतालों को रैफर हो जाते हैं।

कुछ अस्पतालों के डॉक्टर तो मरीजों को खुद के फायदे के लिए दूसरे अस्पताल में रैफर कर देते हैं। कई बार समय पर इलाज मिलने के कारण मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत अब अस्पतालों में पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज काे इलाज देने की जिम्मेदारी ड्यूटी डॉक्टर की होगी।





सिविल सर्जन और सीएमएचओ सुनेंगे शिकायत

योजना के तहत मरीज अौर उनके परिजन अस्पताल में इलाज नहीं मिलने की शिकायत सिविल सर्जन और सीएमएचअो से कर सकेंगे। दोनों अधिकारियों को शिकायत का निराकरण एक हफ्ते के भीतर करना पड़ेगा। तय समय सीमा में सुनवाई नहीं करने पर संभाग के संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे।



24घंटे में देनी होगी रिपोर्ट

अबप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर के अस्पतालों में 5 से 12 प्रकार की जांचें मरीज किसी भी समय करा सकेंगे। जिला अस्पतालों में इनकी संख्या 30 तय की गई है। इसमें सामान्य बुखार से लेकर डायबिटीज तक की जांचें शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक मरीज को नमूना देने के 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट मिलेगी।



स्वास्थ्यगारंटी योजना 2 अक्टूबर से सरकारी अस्पतालों में लागू होगी। इसके तहत अस्पतालों को चार वर्गों में बांटकर प्रत्येक वर्ग के अस्पतालों के लिए पैथालॉजी, मेडिकल और रेडियोलाज़ी की करीब 30 प्रकार की जांचें अनिवार्य की जा रही हैं।



डॉ.अशोक वीरांग, संयुक्त संचालक स्वास्थ