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जहर खाने वाली दो साल की बच्ची को डॉक्टरों ने नहीं दी दवा, मौत

7 वर्ष पहले
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मिसरोद इलाके के जाटखेड़ी में शुक्रवार की दोपहर दो साल की बच्ची ने चूहा मार दवा खा ली। उसे जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि वहां उसे दोपहर ढाई बजे से रात 8 बजे तक कोई दवा नहीं दी गई। डॉक्टरों ने परिजनाें को सलाह दी कि बच्ची को लगातार पानी पिलाते रहें। बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उसे हमीदिया अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

बच्ची के पिता बबलू तोमर ने बताया कि उसकी प|ी मनीषा ने चूहों को मारने के लिए आटे में दवा मिलाकर रखी थी। बेटी पलक ने उन्हें खा लिया। पहले उसे मिसरोद के ही एक निजी अस्पताल ले गए। वहां से जेपी अस्पताल लाए। वहां रात करीब आठ बजे डाॅक्टर ने पलक को ड्रिप लगाई। फिर भी उसकी हालत नहीं सुधरी। हमीदिया अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। बबलू का कहना है कि बच्ची को दवा देने से उसकी मौत हुई है। उधर, जेपी अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. वीणा सिन्हा का कहना है कि इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। इलाज में लापरवाही की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों ने जेपी अस्पताल के डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप