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प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में गलत जानकारी पर 7 साल की जेल

7 वर्ष पहले
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फर्जी दस्तावेज और गलत जानकारी देकर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाना लोगों को मुश्किल में डाल सकता है। राज्य सरकार ऐसा करने वालों को सात साल तक की सजा दिलाए जाने का प्रावधान करने जा रही है। इसके लिए रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में संशोधन किए जाने का प्रस्ताव राष्ट्रपति को मंजूरी के लिए भेजा गया है।

प्रस्ताव में रजिस्ट्री कराने के दौरान कोई व्यक्ति गलत जानकारी या हेरा फेरी किए हुए दस्तावेज प्रस्तुत करता है तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा। मामला सामने आने पर रजिस्ट्रार या डिप्टी रजिस्ट्रार एफआईआर करा सकेंगे। इसके बाद प्रकरण सीजेएम कोर्ट भेजा जाएगा। इसमें दोषी व्यक्ति को सात साल की सजा और जुर्माना दोनों से दंिडत किया जा सकेगा।

फिलहाल है यह व्यवस्था

अभी लागू पंजीयन अधिनियम में हेरा फेरी कर रजिस्ट्री करवाने वालों पर सिर्फ सरकार जांच में गलती पाए जाने पर उनसे प्रॉपर्टी के विक्रय मूल्य का पेनल्टी समेत स्टाम्प शुल्क ही वसूलती है। इससे प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी करने वाले स्टाम्प शुल्क देकर बरी हो जाते हैं।

ऐसा करने पर होगी सजा

{व्यावसायिकजमीन को आवासीय बताकर रजिस्ट्री कराए जाने में।

{रजिस्ट्री कराए जाने के लिए गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हों। इसमें प्लाट या मकान कोने का है। सड़क के किनारे का है और दस्तावेजों में इसे नहीं दर्शाया गया है। मकान या खेती का नक्शा गलत प्रस्तुत किए जाने पर।

{एक बार रजिस्ट्री होने के बाद दोबारा उसे कोई अन्य बेचता है तो वह दोषी होगा। उदाहरण के लिए जमीन का सौदा कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा है जो उसका वास्तविक मालिक नहीं है।

^रजिस्ट्री में होने वाली हेराफेरी रोकने के लिए रजिस्ट्री अधिनियम में संशोधन कर कठोर प्रावधान किए गए हैं। इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलने पर इसे प्रदेश में कड़ाई से लागू किया जाएगा। -जयंतमलैया, वित्तमंत्री

रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा