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हबीबगंज-एलटीटी, हबीबगंज-पुणे एक्सप्रेस हो सकती हैं नियमित
ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | भोपाल
रेल बजट में इस बार हबीबगंज से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) के लिए चलाई जा रही हबीबगंज-एलटीटी एक्सप्रेस को सप्ताह में एक की जगह चार दिन चलाने की घोषणा हो सकती है। यह ट्रेन वर्तमान में प्रति शुक्रवार हबीबगंज से एलटीटी के बीच चलाई जाती है। वहीं, हबीबगंज से पुणे के बीच चलाई जा रही साप्ताहिक स्पेशल एक्सप्रेस को सप्ताह में तीन दिन चलाया जा सकता है। बेंगलुरू के लिए एक नई साप्ताहिक ट्रेन की मांग को भी पूरा किया जा सकता है।
भोपाल रेल मंडल और पश्चिम-मध्य रेलवे से इस संबंध में भेजे गए प्रस्तावों पर गौर किए जाने की संभावना अधिकारियों ने जताई है। वहीं, भोपाल रेलवे स्टेशन के विकास के लिए भेजे गए कुछ प्रस्ताव भी रेल बजट में माने जा सकते हैं।
इसलिएजरूरी है ट्रेनें: भोपालसे मुंबई पुणे के लिए अच्छा रेल ट्रैफिक है। हर दिन मुंबई के लिए विभिन्न ट्रेनों लिंक बसों के माध्यम से एक हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। करीब इतने ही यात्री मुंबई की ओर से यहां आते भी हैं। इसी तरह पुणे के लिए भी हर दिन 200 से 400 यात्री भोपाल से विभिन्न साधनों से आते-जाते हैं। वहीं, भोपाल से मुंबई के लिए प्रतिदिन जाने वाली पंजाबमेल की हर श्रेणी में वेटिंग की स्थिति बनी रहती है। ऐसे ही हालात पुणे की ओर जाने वाली झेलम एक्सप्रेस के भी है।
गंजबासौदासे औबेदुल्लागंज तक मेमू
वर्तमानमें भोपाल से बीना के बीच चलाई जा रही मेमू ट्रेन को गंजबासौदा से औबेदुल्लागंज तक कर इसका एक फेरा बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में यह गाड़ी भोपाल से सुबह 10:30 बजे बीना की ओर रवाना होकर रात को 9 बजे वापस आती है। बीना से भोपाल आने के लिए कई एक्सप्रेस सुपरफास्ट ट्रेनें होने के कारण मेमू को वहां से शिफ्ट कर गंजबासौदा से औबेदुल्लागंज के बीच दो फेरों में चलाया जा सकता है।
भोपाल और इटारसी के बीच रेलवे स्टेशन पर होने वाले विकास कार्यों के लिए 22 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रेल बजट में मांगा जा सकता है। इसमें भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 की ओर नए गेट, सर्कुलेटिंग एरिया के विकास, प्लेटफॉर्म नंबर-1 की ओर नया वीआईपी गेट बनाने, डीलक्स पे एंड यूज टॉयलेट आदि के लिए करीब 10 करोड़ रुपए की मांग भी शामिल है।
केवल शताब्दी का हुआ था एक्सटेंशन
जहांतक पिछले रेल बजट का मामला है, उसमें नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस का केवल हबीबगंज तक एक्सटेंशन ही किया जा सका था। इसके अलावा भोपाल को सीधे तौर पर पिछले बजट में कोई अतिरिक्त ट्रेन नहीं मिली थी।