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क्यों लड़कियों को एक वस्तु की तरह समझा जाता है?

7 वर्ष पहले
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शहीदभवन सभागार में बुधवार को नाटक ‘एक और दामिनी’ का मंचन किया गया। यंग थिएटर ग्रुप की ओर से मंचित इस नाटक को कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए किया गया था। नाटक का लेखन योगेश त्रिपाठी और निर्देशन सरफराज हसन ने किया।

स्टोरीप्लॉट:

नाटकके माध्यम से एक लड़की कई सवाल छोड़ जाती है। उसके सवाल समाज से, मीडिया से और उसके परिवार से होते हैं। क्यों लड़कियों को सिर्फ एक वस्तु की तरह समझा जाता है। ज्यादती की शिकार हुई एक लड़की को समाज बुरी दृष्टि से देखता है। इसके साथ ही मीडिया भी खबर के चक्कर में लड़की की परवाह नहीं करता। लड़की के सवालों के जवाब किसी के पास नहीं होता। नाटक में कॉस्ट्यूम, लाइट और संगीत का बेहतर प्रयोग किया।

मंच पर : राहुलतिवारी, अंजली सिंह, राजेंद्र राजपूत, अमित डूडी, अनिकेत पांडे, सिद्धार्थ चतुर्वेदी, संदीप पाटिल, लोकेंद्र अवस्थी, तरुण मेघानी, सरफराज हसन

मंचपरे : खुशबूपांडे, प्रकाश मिश्रा, राहुल तिवारी,ब्रजेश अनय

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शहीद भवन में बुधवार शाम मंचित नाटक का एक दृश्य।