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धर्म ध्यान से ही आत्म कल्याण: आचार्य सागर

7 वर्ष पहले
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भोपाल| जैनआचार्य विशुद्ध सागर ने कहा कि बहिरंग के भाव से प्रभु के दर्शन और गुरु के उपदेश का श्रवण कर सकते हैं, पर धर्म क्षेत्र के भावों को प्रशस्त करने के लिए पुरुषार्थ जरूरी है। धर्म ध्यान में रमने पर ही आत्म कल्याण संभव है। आचार्यश्री शुक्रवार को नेहरू नगर स्थित जैन मंदिर में प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कि अंतरंग की साधना ध्यान है। प्रारंभ में जैसवाल समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज प्रधान, मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. पीके जैन, राकेश अनुपम, आनंद जैन अन्नू, मुकेश शीतल आदि ने आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन किया। आचार्यश्री शनिवार शाम टीटी नगर जैन मंदिर पहुंचेंगे।