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भोपाल-इंदौर में लाइट मेट्रो चलाने के लिए अलग कंपनी बनाएगी सरकार

7 वर्ष पहले
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भोपालऔर इंदौर में लाइट मेट्रो चलाने के लिए दूसरे राज्यों की तरह मप्र सरकार भी एक अलग कंपनी बनाने जा रही है। लाइट मेट्रो के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बना रही रोहित एसोसिएट्स कॉनसोर्सन (आरएसी) एक-दो सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट देने जा रही है, जिसमें कंपनी बनाए जाने का प्रावधान है।

अंतरिम रिपोर्ट पर राज्य सरकार विचार करने के बाद यह तय करेगी कि कंपनी का संचालन किसके जिम्मे होगा? इसके पीछे प्रमुख वजह यह है कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) में यह प्रोजेक्ट बनना है। प्राइवेट कंपनी के पास ही ऑपरेशन, मेंटेनेंस और इंप्लीमेंटेशन का पूरा जिम्मा होगा। इसलिए सरकार की भूमिका सिर्फ मॉनिटरिंग तक सीमित रह सकती है।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वैंकेया नायडू ने पिछले हफ्ते भोपाल में यह संकेत दिए थे कि भोपाल और इंदौर में लाइट मेट्रो के लिए जैसे ही डीपीआर केंद्र सरकार को मिलेगी, तत्काल उसे मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद से राज्य सरकार कोशिश कर रही है कि चार माह के भीतर रिपोर्ट केंद्र को भेज दी जाए, ताकि केंद्र सरकार के 2015-16 के बजट में यदि लाइट मेट्रो के लिए कोई प्रपोजल हो तो मप्र के भोपाल इंदौर शहर शामिल रहें। भोपाल और इंदौर में अभी लगभग 75 किमी का रूट लाइट मेट्रो के लिए तय है। इसकी प्रस्तावित लागत 15,000 करोड़ रुपए है।

2015-16

के केंद्रीय बजट में मेट्रो का प्रपोजल शामिल कराने की है तैयारी



15,000

करोड़ है लागत, डीपीआर फाइनल होने के बाद बढ़ सकती है रािश

अध्ययन के लिए दिल्ली जाएंगे

जल्दही नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के अफसरों की टीम दिल्ली समेत उन शहरों में जाएगी, जहां मेट्रो का संचालन कंपनी के माध्यम से हो रहा है। विभाग के ओएसडी परिवहन कमल नागर उस टीम का नेतृत्व करेंगे। इस टीम की रिपोर्ट और डीपीआर को मिलाकर प्रपोजल केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

चार माह में भेज देंगे रिपोर्ट

^लाइटमेट्रो की डीपीआर रिपोर्ट चार माह के भीतर केंद्र सरकार को भेजेंगे। यह संभावना बन रही है कि मेट्रो का संचालन कंपनी बनाकर किया जाए। मुख्यमंत्री की चेयरमैनशिप में यह कंपनी काम कर सकती है।’\\\' कैलाशविजयवर्गीय, मंत्री,नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग