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मणप्पुरम् लूट की रकम से िकया था पटना में ब्लास्ट

7 वर्ष पहले
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सिमीऔर आईएम के आतंकियों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से फंडिंग मिलनी बंद हो गई है। इसके चलते आतंकियों ने ‘माल-ए-गनीमत\\\' के नाम से एक अलग सेल बनाया है। माल-ए-गनीमत का मतलब है जिहाद के लिए लोगों से पैसा इकट्ठा करना। एक साल पहले अबु फैजल के साथ खंडवा जेल तोड़कर भागे आैर हाल ही में बिजनौर से फरार सिमी के पांच आतंकियों ने भोपाल के मणप्पुरम् गोल्ड फायनेंस कंपनी समेत कई बैंकों में डकैती डालकर फंड इकट्ठा किया था।

पटना ब्लास्ट के मामले में रांची से पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि उन्हें पटना में नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली के दौरान बम ब्लास्ट करने के लिए पांच लाख रुपए मिले थे। यह पैसा उन्हें अगस्त 2010 में भोपाल स्थित मणप्पुरम् गोल्ड फायनेंस कंपनी की ब्रांच से ढाई करोड़ रुपए की लूट की रकम से मिला था। यह पैसा खंडवा जेल से फरार आतंकी अबु फैजल ने दिया था। इन आठ आतंकवादियों में से चार आतंकवादी अबु फैजल, असलम, एजाज और जाकिर खंडवा जेल में कैद थे, जो सेंध मारकर भागे थे।

आईएम के आतंकी असदुल्ला अख्तर उर्फ हड्डी ने पूछताछ में खुलासा किया कि अबु फैजल ने माल-ए-गनीमत नाम से सेल बनाई थी। आईएम के संस्थापकों में से एक मिर्जा बेग ने ‘माल-ए-गनीमत\\\' की शुरुआत दुबई से की थी। वे दुबई के रईसों से पैसा वसूलकर हवाला के जरिए भारत में बैठे आतंकियों तक पहुंचाते थे।