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शहर के बाहर 6% जमीन आरक्षित करके ही शुरू हो सकेंगे प्रोजेक्ट

7 वर्ष पहले
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नगरनिगम सीमा के बाहर नई कॉलोनी विकसित करने संबंधी नए प्रावधानों को राज्य सरकार ने अंतिम रूप दे दिया है। अब कॉलोनाइजर कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए 6 फीसदी भूखंड, फ्लैट या डुप्लेक्स आरक्षित करके ही आवासीय प्रोजेक्ट शुरू कर सकेंगे। यदि बिल्डर 6 फीसदी भूखंड आरक्षित नहीं करते हैं तो आश्रय शुल्क जमा करने का भी विकल्प दिया गया है। इन प्रावधानों को कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाएगा। शेष| पेज 17 पर



नगरीयसीमा से बाहर कॉलोनी बनाने के लिए राज्य सरकार नए निगम लागू कर रही है। सरकार ने इस बारे में तैयार किए गए प्रस्ताव में 20 फीसदी जमीन छोड़ने का प्रावधान किया था। कॉलोनाइजर्स की आपत्ति के बाद इसे घटाकर अब 6 फीसदी किया गया है।



- अतिरिक्त आश्रय शुल्क की दर भी घटाई

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित विकास के लिए अतिरिक्त आश्रय शुल्क की दर को भी 500 रुपए से घटाकर 100 रुपए प्रति वर्गमीटर किया जा रहा है। पुराने नियमों में बिल्डरों को 10 फीसदी जमीन कमजोर आय वर्ग के लिए छोड़ना पड़ता है, इसलिए बिल्डर चाहते थे कि इसके ऐवज में नगरीय सीमा की तरह आश्रय शुल्क का प्रावधान किया जाए।



- नए प्रावधान में ये भी शामिल

1. वर्तमान में रजिस्ट्रीकरण शुल्क 5 हजार और नवीनीकरण शुल्क 2 हजार रुपए है। यह अब क्रमश: 50 हजार रुपए और 10 हजार रुपए होगा।

2. विकास की अनुमति का शुल्क ग्राम पंचायत में 5 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर देय होगा।



कोट्स...

पंचायतों में आवासीय प्रोजेक्ट को प्रावधानों के तहत लाना जरूरी था। विभाग की ओर से इसका खाका बना लिया गया है। जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा।

- गोपाल भार्गव, मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग

- नए प्रोजेक्ट काे गति मिलेगी

क्रेडाई के प्रवक्ता मनोज सिंह मीक का कहना है कि इन प्रावधानों से नए आवासीय प्रोजेक्ट को गति मिलेगी। हालांकि आश्रय शुल्क को लेकर कुछ प्रावधान ऐसे भी जिनसे कुछ आर्थिक भार एलआईजी, एमआईजी या एचआईजी आवासों पर आएगा। वैसे भी सरकार की नीति रहती है कि पहले 4-6 गुना बढ़ाओ, फिर दो गुना पर फाइनल मुहर लगा दो।

{पहले 20 फीसदी का था प्रस्ताव, कॉलोनाइजरों को राहत देने की तैयारी

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पहली बार आश्रय शुल्क

आश्रयशुल्क का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पहली बार किया जा रहा है। आश्रय शुल्क के त