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इन जगहों से अनजान हैं हम

7 वर्ष पहले
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पुरातात्विकधरोहरों से घिरे शहर के आसपास कई ऐसे नेचुरल स्पॉट्स हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। यहां हजारों साल पुराने रॉक शेल्टर्स मौजूद हैं, जिन्हें आिर्कयोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने ढूंढ़ निकाला है। वर्ल्डटूरिज्म डे केमौके पर हम सिटी के आसपास की कुछ ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में बता रहे हैं, जहां विदेशी पर्यटक तो जाना पसंद करते हैं, लेकिन शहर के बाशिंदे ही इन खूबसूरत पर्यटन स्थलों से अनजान हैं।

सतधारा:यहांदेखें सदियों पुराने बौद्ध स्थल

शहरसे 35 किमी दूर विदिशा रोड पर स्थित सतधारा में बौद्ध स्थल मौजूद हैं। इस इलाके में पहाड़ी पर कई रॉक शेल्टर भी खोजे गए हैं। इसमें गुप्त कालीन गौतम बुद्ध की पेंटिंग सबसे खास है। एएसआई के रिटायर्ड अधिकारी डॉ. नारायण व्यास बताते हैं कि यह गुप्त कालीन पेंटिंग इस क्षेत्र में गौतम बुद्ध की पहली पेंटिंग है। इसके अलावा हलाली नदी के किनारे फैले इस इलाके में कई दर्शनीय स्मारक, स्तूप और मंदिर भी हैं, लेकिन इनकी जानकारी होने के कारण पर्यटक यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। साथ ही विदिशा रोड पर ही शहर से 35 किलोमीटर दूर सोनारी स्थान है। इस क्षेत्र में बौद्ध विहार है। यहां पर लगभग 2200 साल पुराने बौद्ध स्तूप हैं।

सतकुंडा:हजारोंसाल पुराने रॉक शेल्टर्स

शहरसे 30 किमी दूर रायसेन रोड पर स्थित सतकुंडा में हजारों साल पुराने रॉक शेल्टर हैं। इन प्राकृतिक शैलाश्रय में दो मंजिल वाले रॉक आर्ट पाए गए हैं। यहां आधा किमी लंबी चट्टानों पर युद्ध के दृश्य वाले शैलचित्र उभरे हैं। ये हिस्टोरिकल पीरियड (लेखन क्रिया से संबंधित) के शैलचित्र हैं।

रायसेन रोडपर शहर से 35 किमी दूर स्थित उरदेन गांव में सैकड़ों साल पुराने रॉक शेल्टर्स हैं। यहां पर 3 से 4 किमी लंबे पहाड़ पर लाल और सफेद रंग की पेंटिंग्स बनी हुई हैं। इनमें उस दौर के युद्ध, जानवर, हथियारों और लोकजीवन शैली को उकेरा गया है। शहर के आसपास स्थित ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के लिए खुले हुए हैं।

-एल कृष्णमूर्ति, डीएफओ,भोपाल

खरबई: रॉकशेल्टर्स

रायसेन रोड पर ही शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर खरबई गांव में 70 रॉक शेल्टर्स हैं। यहां पर मध्याश्म, ताम्राश्म और मध्यकालीन शैलचित्र हैं। इन शैलचित्रों में पूजा-पाठ के दृश्य दिखाए गए हैं। उस समय की जीवन शैली को शैलचित्रों में उभारा गया है।

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