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एम्स : रेसीडेंट डॉक्टरों को राहत देने की तैयारी

6 वर्ष पहले
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राजधानी के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) में कार्यरत रेसीडेंट डॉक्टरों का कार्यकाल दो साल और बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने एक प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को भेज दिया है।

प्रस्ताव में एम्स डायरेक्टर डॉ. संदीप कुमार द्वारा जिपमर के डायरेक्टर की गैरमौजूदगी में रेसीडेंट डॉक्टरों की भर्ती को वैध करने का सुझाव दिया गया है। रेसीडेंट डॉक्टरों की बहाली के इस प्रस्ताव पर चर्चा 9 फरवरी को एम्स की जनरल बॉडी की मीटिंग में होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों ने बताया कि डॉ. संदीप कुमार ने रेसीडेंट डॉक्टरों की भर्ती रेसीडेंसी स्कीम के तहत की है। इस कारण संस्थान में कार्यरत रेसीडेंट डॉक्टरों को ग्रुप के तहत नियुक्ति होना कतई माना जाए। साथ ही संस्थान में कार्यरत डॉक्टरों की सेवाएं दो साल के लिए बढ़ा दी जाएं। इससे एम्स भोपाल को मरीजों के इलाज के लिए फिलहाल डॉक्टरों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

भविष्यमें बने ऐसी स्थिति

अफसरोंके मुताबिक रेसीडेंट डॉक्टरों का कार्यकाल बढ़ाने के साथ ही एम्स डायरेक्टर को रेसीडेंट डॉक्टरों के शेष पदों पर नियुक्ति ग्रुप के भर्ती नियमों के तहत करने का नोटिस दिया जाए। ताकि भविष्य में भोपाल एम्स सहित दूसरे एम्स में इस तरह की स्थिति नहीं बने।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों के मुताबिक एम्स डॉयरेक्टर डॉ. कुमार ने रेसीडेंट डॉक्टरों की भर्ती में नियमों का उल्लंघन किया है। डॉ. कुमार ने ग्रुप के तहत स्वीकृत रेसीडेंट डॉक्टरों के 64 पद रेसीडेंसी स्कीम से भरे हैं, जो गलत है। इस कारण एम्स डायरेक्टर डाॅ. संदीप कुमार से नियमों का उल्लंघन करने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।