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कर्मचारी धरने पर, मंत्रालय में तीन घंटे तक कामकाज ठप

6 वर्ष पहले
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मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारियों ने शनिवार को लंबित मांगों को लेकर धरना दिया, जिससे तीन घंटे तक कामकाज ठप रहा। धरना सुबह 11 बजे से शुरू हुआ, जो दोपहर ढाई बजे तक चला। मंत्रालय कर्मचारी संघ का दावा है कि धरने में 700 से ज्यादा कर्मचारी शामिल हुए। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव के. सुरेश का कहना है कि सभी विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति सामान्य रही।

मंत्रालय में कर्मचारियों और सामान्य प्रशासन विभाग के बीच टकराव की वजह परामर्शदात्री समिति की बैठक समय से बुलाया जाना है। 16 जनवरी 2012 के बाद से अब तक कर्मचारियों की समस्याएं सुलझाने के लिए सरकार ने बैठक नहीं बुलाई। मंत्रालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का आरोप है कि जीएडी में उपसचिव बीआर विश्वकर्मा को हटाया नहीं जा रहा है। उनके पास मंत्रालय में खरीदी समेत 25 शाखाओं का चार्ज है। मंत्रालय साख समिति में गड़बड़ी के दोषी अफसर 31 दिसंबर को रिटायर हो गए, समय रहते उन पर क्यों कार्रवाई नहीं की गई। सरकार कर्मचारियों की मांगों को नहीं मानेगी तो आगे बेमियादी हड़ताल करेंगे।

लाल सिंह आर्य, राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन

सीधी बात

क्या वजह है कि मंत्रालय के कर्मचारियों को धरना देना पड़ा?

कर्मचारियोंकी अधिकांश मांगें पूरी कर दी गई हैं। इसलिए कामकाज ठप करने का कोई औचित्य नहीं है।

परामर्शदात्रीसमिति की बैठक बीते दो साल से नहीं हुई है?

मुख्यमंत्रीस्वयं कर्मचारियों की मांगों पर संवेदनशील हैं। इसलिए यह कहना गलत है कि मांगें नहीं सुलझ रही हैं।

क्याधरना देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी ?

इसकीजांच करवाई जाएगी।



सवाल - मंत्रालय कर्मचारी संघ का आरोप है कि जीएडी में पदस्थ उप सचिव बीआर विश्वकर्मा के पास एक से अधिक शाखाओं का प्रभार है। उनका तबादला क्यों नहीं किया जा रहा है?

जवाब - यह सरकार का विशेषाधिकार है कि किस अफसर की सेवाएं कहां ली जाना है। इसमें कर्मचारियों का हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है।

सवाल - धरना देकर सरकारी कामकाज ठप करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी?

जवाब -

सवाल - सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव हो, इसके लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

जवाब - कोशिश रहेगी कि आगे कर्मचारियों को धरना देना पड़े। अधिकारियों को कर्मचारियों की मांगों पर विचार कर उन्हें पूरा करने के निर्देश दिए जाएंगे।

{ सेक्शन आॅफिसर और निज सचिव का वेतनमान 6500-10500 रुपए से बढ़ाकर 8000-13500 रुपए किया जाए।

{मंत्रालय साख समिति में गड़बड़ी के दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

{सहायक ग्रेड-1 को बगैर रिकवरी के समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए।

{ दफ्तरी का वेतन बीते सत्रह साल से नहीं बढ़ा है, जिसमें बढ़ोतरी की जाए।

{ सीधी भर्ती और प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों को समान रूप से लाभ दिए जाएं।

मांगों के समर्थन में मंत्रालय के सामने धरना देते कर्मचारी। फोटो|भास्कर