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जेपी अस्पताल में 100 रुपए में बन रहा अनफिट सर्टिफिकेट
जेपी अस्पताल में दस्तावेज वेरिफिकेशन पर रोक लगाने के बावजूद हकीकत यह है कि यहां अनफिट सर्टिफिकेट बनाने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। 100-200 रुपए में ये सर्टिफिकेट बनाए जा रहे हैं। दो दिन पहले ही रुपए लेकर अनफिट सर्टिफिकेट बनाने के आरोप में डॉ. जगदीश सूर्यवंशी के पकड़े जाने के बाद की गई पड़ताल में यह खुलासा हुआ है। यहां के कुछ डॉक्टर सर्टिफिकेट और रुपयों का लेनदेन ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर और सुरक्षा गार्ड्स के जरिए कर रहे हैं। शनिवार को जेपी अस्पताल के तीन डॉक्टरों ने 12 मरीजों के अनफिट सर्टिफिकेट बनाए हैं।
कोलार निवासी राजेंद्र कुशवाह एक कंपनी में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव हैं। शनिवार को उन्होंने इमरजेंसी यूनिट के कर्मचारी को 200 रुपए की रिश्वत देकर एक सप्ताह का मेडिकल अनफिट सर्टिफिकेट बनवाया। कर्मचारी ने उन्हें यह सर्टिफिकेट सडाना मेडिकल स्टोर के नजदीक स्थित एक दुकान पर बुलाकर दिया। इसी तरह व्यापमं की महिला पर्यवेक्षक परीक्षा में शामिल हो रही सुषमा त्रिपाठी ने 100 रुपए देकर फोटो अटेस्ट कराई। सुषमा के अनुसार पहले तो डॉक्टरों ने मेडिकल ऑॅफिसर की सील नहीं होने का कहकर मना कर दिया। इसके बाद एक कर्मचारी उनके पीछे-पीछे पार्किंग तक आया। उसने फोटो अटेस्ट कराने की फीस 100 रुपए बताई तथा दस्तावेज एक घंटे बाद देने की बात कही।
इस पर उसे परीक्षा का प्रवेश-पत्र और फोटो 100 रुपए के साथ दे दिए। बकौल सुषमा करीब 45 मिनट बाद उक्त कर्मचारी ने प्रवेश-पत्र पर लगी फोटो सत्यापित कराकर पार्किंग के बाहर आकर दे दी।
जेपी अस्पताल में रुपए लेकर सर्टिफिकेट बनाने पर डॉक्टर के पकड़ाए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में सख्ती बरती है। लिहाजा अब सभी डॉक्टर्स को ताकीद कर दी गई है कि वे किसी भी तरह के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन नहीं करेंगे। जेपी अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में शनिवार को फोटो और दस्तावेज सत्यापित किए जाने का नोटिस, बोर्ड पर चस्पा करा दिया गया। यह नोटिस प्रभारी अस्पताल अधीक्षक डॉ. वीके चौधरी के निर्देश पर लगाया गया है। उन्होंने बताया कि फोटो और दस्तावेजों के सत्यापन में डॉक्टरों के व्यस्त होने पर मरीजों का इलाज बाधित होता है। इस कारण यह नोटिस चस्पा किया है।